उज्जैन। समाधि में दबी लापता साधु की लाश को प्रशासन की अनुमति के बाद खोदकर बाहर निकाला गया था। शनिवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद दोपहर में लाश का उसी स्थान पर भाई की मौजूदगी में समाधि दी गई। साधु की मौत का राज पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने पर सामने आ पायेगा।
जावरा के रहने वाले अनिल पिता किशोर जोशी ने 17 जून को उज्जैन आने के बाद चिमनगंज थाना पुलिस को भाई गंगेश्वरगिरी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी और बताया कि मंगलनाथ मंदिर के पास मलानी बाबा की कुटिया में रहता था। 10 जून से संपर्क नहीं हुआ है। मंगलनाथ मंदिर मार्ग पर कुटिया पहुंचने पर सामने आया कि उसके भाई की मौत हो चुकी है और उसे कुटिया के पीछे समाधि दी गई है। अनिल जोशी ने भाई की हत्या का आरोप लगाया और निष्पक्ष जांच की मांग रखी। शुक्रवार को चिमनगंज थाना प्रभारी विवेक कनोड़िया ने प्रशासन की अनुमति के बाद समाधि खोदकर शव बाहर निकला और पोस्टमार्टम के लिये अस्पताल पहुंचाया। शनिवार पोस्टमार्टम के बाद शव को दोबारा उसी स्थान भाई की मौजूदगी में समाधि दी गई। थाना प्रभारी के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर मौत की वजह स्पष्ट हो पायेगी। फिलहाल मामले में मर्ग कायम किया गया है।
8 से 9 दिन पुराना हो चुका था शव
चिमनगंज थाना एसआई लिबिन खेस ने बताया कि साधु गंगेश्वरगिरी का शव 8 से 9 दिन पुराना हो चुका था। उसे समाधि देने के के दौरान नमक में दबाया गया था। जिसके चलते शरीर की ऊपरी चमड़ी गल चुकी थी। भाई ने आरोप लगाया था कि गंगेश्वरगिरी के साथ नीमच के महाराज भास्करानंद और लगड़ा गुरू ने मारपीट की थी। 10 जून को मोबाइल पर बातचीत के दौरान विवाद की आवाज सुनाई दी थी। चमड़ी गलने से चोंट के निशान स्पष्ट नहीं हो पाये है। मामला पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगा।
भाई बोला दोषियों को सजा मिले
16 साल पहले साधु बन चुके गंगेश्वरगिरी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराने और हत्या का आरोप लगाकर समाधि से शव निकलवाने के बाद पोस्टमार्टम कराने वाले भाई अनिल जोशी ने कहा कि उसे पूरी शंका है कि भाई की हत्या में भास्करानंद और लगड़ा गुरू शामिल हो सकते है। अगर गंगेश्वरगिरी की मौत हो चुकी थी तो उसे समाधि देने वाले राजेश गुरू और कृष्णादास का परिजनों को सूचना देना थी। दोनों ने बाले-बाले समाधि दी गई है। उसे न्याय मिले और दोषियों को सजा हो।
पोस्टमार्टम के बाद फिर से साधु को दी गई समाधि