उज्जैन। संभाग के देवास जिला अंतर्गत खिवनी वन्य जीव अभ्यारण्य में जंगलराज की सत्ता का परिवर्तन हो गया है। कल तक वहां बाद्य युवराज का राज चलता था अब उसी सत्ता पर नया बाद्य काबिज हो चुका है। दोनों के बीच जंग में 11 वर्षीय युवराज हार गया और उसे घायल अवस्था में वन विभाग ने रेस्क्यू कर भोपाल के वन विहार में छोडा है। युवराज एवं मीरा की जोडी खिवनी में आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण बन गई थी।खिवनी वन्य जीव अभ्यारण्य में पर्यटकों की पहली पसंद बन चुके और पर्यटकों को देखकर सामने आने वाले बाद्य युवराज को अब यहां से प्रबंधन ने हटा दिया है। बाद्य युवराज को अभ्यारण्य प्रबंधन ने शुक्रवार को घायल अवस्था में लंगडाते हुए देखा था। इसके बाद उसे शनिवार को वन विहार भोपाल एवं देवास के दल ने कडी मशक्त के बाद रेस्क्यू आपरेशन किया गया। घायल बाद्य युवराज को बेहोश किया गया और उसे भोपाल शिफ्ट कर दिया। खिवनी अभ्यारण्य अधीक्षक विकास माहौर के अनुसार संभवत: नए बाद्य से वर्चस्व की लडाई के दौरान युवराज घायल हुआ है। उसकी उम्र करीब 10-11 वर्ष थी। वैसे विभाग में बाद्यों के नाम टी-1 या इस तरह से रहते हैं। हमारे यहां नाम बहुत कम ही रखे जाते हैं। ये भी संभव है कि मेटिंग के सीजन में नई मादा बाद्य के साथ आए नए बाद्य और इसके बीच वर्चस्व की जंग हुई हो। भोपाल कालियासोत से लेकर,सिहोर से बाद्यों का मुवमेंट खिवनी में होता है। खिवनी पिछले 8-10 सालों में बाद्यों के लिए प्राकृतिक प्रजनन केंद्र के रूप में विकसित हुआ है।अगले पैर घायल मिले-वन विभाग के सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को वन विभाग की टीम ने जंगल गश्त के दौरान युवराज को लहूलुहान और लंगडाते हुए देखा था।उसके अगले पैरों पर नाखूनों के ताजा जख्म थे। वन्यजीव व्यवहार के अनुसार, वर्चस्व की लड़ाई में बाघ हमेशा एक-दूसरे के पंजों को निशाना बनाते हैं। इससे प्रतिद्वंदी शिकार नहीं कर पाता। उम्रदराज होने के कारण युवराज नए युवा बाघ की फुर्ती का मुकाबला नहीं कर सका। उसके नाखून टूट गए। उसके पैर डैमेज हो गए। वह शिकार करने और चलने में अक्षम हो गया। अब उसकी सल्तनत पर नए बाघ का आधिपत्य हो गया है।रेस्क्यू के दौरान नया बाद्य ने दी दस्तक-वन विभाग का दल जब शनिवार को युवराज को रेस्क्यू आपरेशन चला रहा था उस दौरान भी नये बाद्य ने नजदीक में ही दस्तक दी थी। तत्काल ही दल ने उसे वहां से भगा दिया था। अधीक्षक श्री माहौर इस बात की पुष्टि करते हैं। इधर इस मामले में वन्यजीव विशेषज्ञों एवं चिकित्सकों से चर्चा किए जाने पर उनका कहना था कि वर्तमान समय इनके मैटिंग का रहता है। ऐसे में खिवनी की बाद्यिन मीरा के दो छोटे बच्चे हैं और नई बाद्यिन के क्षेत्र में आने पर 10-11 साल के युवराज की नए बाद्य से वर्चस्व की जंग में हार हुई। इसी में युवराज की सत्ता खिवनी के जंगल राज से सिमट गई।15 सालों में बदला खिवनी-मध्यप्रदेश के पहले वन्यजीव अभ्यारण्य के तौर पर खिवनी को 1983 में पंजीयन किया गया था। सिहोर एवं देवास जिले के क्षेत्र के इस अभ्यारण्य में वन्य जीवों एवं मानव संघर्ष की स्थिति नहीं के बराबर है। पिछले 15 वर्षों में यहां बाद्यों की सीधी आवाजाही बढी है। वर्ष 2018 से अभ्यारण्य को बाद्यों के अनुकुल स्थितियां मिलने पर धीरे-धीरे यहां संख्या बढती गई। जंगल में उनके लिए पर्याप्त पानी एवं अन्य संसाधन मुहैया कराने पर स्थितियां पक्षधर बनती चली गई। 2022 तक वन्य जीवों एवं खासकर बाद्यों के लिए काम किए जाने पर स्थिति इतनी अनुकुल हो गई कि अभ्यारण्य को बाद्यों ने प्राकृतिक प्रजनन केंद्र के रूप में ग्रहण कर लिया। बकौल अधीक्षक श्री माहौर अभी हमारे यहां की बाद्यों की संख्या राष्ट्रीय गणना की सामने आने वाली है।