खुसूर-फुसूर टंकी है तो मिल क्यों नहीं रही… शहर में खाद्य गैस के लिए जिधर देखो उधर लाईनें लग रही है। एजेंसी के बाहर से लेकर गोदाम तक और वहां से लेकर डिस्ट्रीब्यूशन पाइंट तक यही हाल कायम हो रहे हैं। नियमों के तहत उपभोक्ता से बात की जा रही है। बराबर उसके दिन गिने जा रहे हैं और उसके बाद भी सप्लाय में अधिक दिन लगाकर टंकी दी जा रही है। उपभोक्ता के घर तक टंकी नहीं पहुंचाई जा रही है उससे बराबर इसका चार्ज लिया जा रहा है।…
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