April 18, 2024

इंदौर। अमरनाथ में बादल फटने से हुई तबाही में इंदौर के सात लोग बिछड़ गए। एक महिला बहते-बहते बची। सैनिकों ने उन्हें सुरक्षित कैंप में पहुंचाया। कैलाश का भट्टा से बाबा अमरनाथ के दर्शन करने गए लोग अलग-अलग हो गए लेकिन फिलहाल सभी सुरक्षित हैं। इंदौर के कैलाश का भट्टा से गए कुछ परिवारों ने भी तबाही का मंजर देखा। रहवासी शुभम भावसार के मुताबिक चार जुलाई को अंजना भावसार, उर्मिला भावसार, विनिता भावसार, रेखा रघुवंशी, संतोष मीणा, राजेश मीणा, लक्ष्मी मीणा ट्रेन से अमरनाथ गए थे।
अंजना, उर्मिला, विनिता और रेखा खच्चर से बालटाल से गुफा तक पहुंच गई। दर्शन होने से कुछ देर पहले ही सैलाब आ गया और अभी अलग-अलग हो गई। अंजना, विनिता और उर्मिला तो मिल गई लेकिन रेखा का पता नहीं चल पाया। उनके साथ गए जत्थे ने सेना की मदद ली और अनाउंसमेंट करवा कर सुरक्षित कैंप में भेजा। हालांकि राजेश संतोष और लक्ष्मी से अभी नहीं मिलें है। सेना ने उन्हें पहलगांव में ही रोका है। मोबाइल नहीं होने के कारण स्वजन से संपर्क नहीं हुआ। शनिवार को रेखा ने एक पुलिसकर्मी से फोन लेकर परिवार से बात की और बताया वह सुरक्षित है

देवदूत बनकर आए सैनिक

ऐसा सैलाब कभी नहीं देखा। बादल फटने के कुछ ही देर में सब ओर पानी-पानी हो गया। लोग ऐसे बहे जैसे पानी में कागज की नाव बह रही हो। मैं बच गई, लेकिन मेरा बैग और मोबाइल भी बह गया। सैनिक फरिश्ते बनकर आए। मुझे सुरक्षित कैंप में पहुंचाया। साथ आए यात्रियों का ब्योरा निकाला और उनके पास पहुंचाया।