खुसूर-फुसूर हादसे के बाद भी नहीं आई गंभीरता… हमारी आदत है कि हम सांप निकलने के बाद लाठी पीटते हैं

खुसूर-फुसूर हादसे के बाद भी नहीं आई गंभीरता… हमारी आदत है कि हम सांप निकलने के बाद लाठी पीटते हैं। वो भी मसानिया संकल्प के साथ। वक्त के साथ संकल्प गायब हो जाता है। नीमच के पास मधुमक्खियों के हादसे में कंचनबाई बच्चों को बचाने में शहीद हो गई । इस हादसे ने यह तय किया था कि आंगनवाडी,प्राथमिक एवं अन्य विद्यालय भवनों के पास वृक्षों पर मधुमक्खियों के छत्ते खतरे की घंटी बजा रहे हैं। इनसे कभी भी हादसा होना संभावित है। इस घटना से भी हमने सबक नहीं…

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