विकास में अड़ंगा लगाने वाले एनजीटी में हुए परास्त, मोरवन में उद्योग स्थापना की बाधा दूर

नीमच। क्षेत्र में औद्योगिक विकास और रोजगार की संभावनाओं को बदनाम करने की कोशिशों को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से बड़ा झटका लगा है। नीमच जिले के जावद तहसील अंतर्गत मोरवन गांव में प्रस्तावित टेक्सटाइल उद्योग की स्थापना के खिलाफ दायर याचिका को एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने खारिज कर दिया गया है। याचिकाकर्ता ने उद्योग की स्थापना से मोरवन बांध, भूजल और आसपास की कृषि भूमि को नुकसान होने की आशंका जताते हुए पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया था। हालांकि, मामले की जांच के लिए गठित संयुक्त समिति की रिपोर्ट, उद्योग को मिली अनुमतियों और मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व आदेश को ध्यान में रखते हुए एनजीटी ने याचिका को आधारहीन पाते हुए निरस्‍त कर दिया तथा स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी तरह का उल्लंघन सामने नहीं आया है, इसलिए आगे किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है। याचिका अंबालाल बंजारा की ओर से दायर की गई थी।
मोरवन बांध और आसपास के क्षेत्र में प्रदूषण की जताई थी आशंका-याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में मोरवन बांध के पर्यावरण और सामाजिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा था कि याचिका के आधार पर एनजीटी ने 3 जुलाई 2026 को नीमच कलेक्टर के प्रतिनिधि और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि की संयुक्त समिति गठित कर मौके का निरीक्षण करने और तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
हाईकोर्ट के आदेश को भी एनजीटी ने माना आधार-इस मामले में इससे पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में भी याचिका क्रमांक 42737/2025 दायर की गई थी। वहां जमीन को गोचर भूमि बताकर उसके औद्योगिक उपयोग पर सवाल उठाए गए थे। हाईकोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को संबंधित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश दिया था। हालांकि, 5 फरवरी 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान दस्तावेजों के आधार पर प्रथम दृष्टया भूमि आवंटन को कानून के अनुरूप मानते हुए यथास्थिति का अंतरिम आदेश समाप्त कर दिया गया था।एनजीटी ने अपने अंतिम आदेश में स्पष्ट किया कि उद्योग को मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 और वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1981 के तहत स्थापना की सहमति (Consent to Establish) और संचालन की सहमति (Consent to Operate) प्राप्त करके उद्योग की स्‍थापना एवं संचालन कर सकती है।
एनजीटी ने कहा कि प्रस्‍तावित उद्योग की स्‍थापना से किसी प्रकार का उल्लंघन स्‍पष्‍ट नहीं है,  इसलिए आगे किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है। इसी के साथ मूल आवेदन क्रमांक 142/2026 का निराकरण करते हुए खारिज कर दिया गया है।

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