उज्जैन। मालवा अंचल के शाजापुर–शुजालपुर क्षेत्र में लगातार दुसरे वर्ष बोमा पद्धति से कृष्णमृग (ब्लैकबक) कैप्चर एवं स्थानांतरण अभियान का द्वितीय चरण जारी है। बुधवार को अभियान के 11वें दिन गुलाना तहसील के ग्राम गावड़ी में 47 कृष्णमृगों का रेस्क्यू किया गया। इसके साथ ही अभियान के द्वितीय चरण में अब तक कुल 710 कृष्णमृगों का रेस्क्यू किया जा चुका है। अभियान 31 अक्टूबर तक रहेगा और इसमें 2 हजार रेस्क्यू का लक्ष्य है।शाजापुर जिले में पिछले वर्ष भी अभियान चलाया गया था। उस दौरान कुल 846 कृष्णमृगों के साथ 67 नीलगायों को पकडा गया था। कुल 21 दिन के अभियान में तकनीकी कारणों से कम दिन अभियान चल सका था। इसी से उत्साहित होकर वन विभाग ने इस वर्ष भी अभियान चलाया है। इसमें पिछले 11 दिनों में रेस्क्यू का आंकडा 710 पर पहुंच गया है। अभी अभियान को 10 दिन शेष हैं।
फसलों की क्षति को रोकना-अभियान का मुख्य उद्देश्य मानव–वन्यप्राणी द्वंद्व एवं फसलों को होने वाली क्षति को कम करना, प्रभावित ग्रामीण समुदायों को राहत प्रदान करना तथा कृष्णमृगों को सुरक्षित तरीके से उपयुक्त वन्य आवास में स्थानांतरित करना है। अभियान के द्वितीय चरण में कुल 2,000 कृष्णमृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
दक्षिण अफ्रीका की टीम – अभियान में दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञ संस्था कंजर्वेशन सॉल्यूशंस का तकनीकी सहयोग प्राप्त हो रहा है। पशु चिकित्सकों, वन अधिकारियों एवं मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रशिक्षित मैदानी कर्मचारियों की टीम निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार वन्यजीवों के सुरक्षित रेस्क्यू, हैंडलिंग एवं परिवहन का कार्य कर रही है। अभियान के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा एवं कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
गावडी में आज भी रहेगा अभियान-ग्राम गावड़ी क्षेत्र में अभियान गुरूवार सुबह भी जारी रहेगा। बुधवार को रेस्क्यू किए गए कृष्णमृगों को राष्ट्रीय पार्क कूनो वन्यजीवों के विशेष रूप से बने ट्रकों में भर कर भेजा गया है। इन सभी को वहां के खुले जंगल में छोडा जाएगा।