इन्दौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की कोर्ट ने इंदौर-देवास बायपास की बदहाली को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई दौरान बायपास पर हुए गड्ढ़ों को जानलेवा मानते मौखिक टिप्पणी की कि ये गडडे इतने बड़े है कि किसी भी वाहन चालक की जान तक जा सकती है।कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से 2023 से अब तक किया क्या है यह सवाल पूछते सात दिन में बायपास के सभी गड्ढों को भरने के मौखिक निर्देश दिए। हाईकोर्ट में संस्था मातृ फाउंडेशन की ओर से एड्वोकेट अमेय बजाज ने बायपास की बदहाली को लेकर सन् 2021 में यह जनहित याचिका दायर की थी। सुनवाई दौरान एनएचएआइ के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि हमने ठेकेदार कंपनी को हटा दिया है। अब इस याचिका कीआवश्यकता नहीं है। इस पर याचिकाकर्ता ने आपत्ति ले कहा कि हमने 10 बिंदुओं पर याचिका दायर की है। इसमें ठेकेदार ही को मुख्य रूप से रखा है।
एनएचएआइ के वकीलों ने कहा कि बायपास की दशा सुधारने का काम भी जारी है। जिसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट के समक्ष 10 जुलाई के फोटो पेश कर बायपास पर गड्ढे बताए गए। नायता मुंडला के पास लगभग 18 फीट का गड्ढ़ा है और इस पर घास उगने लगी है, जिससे यह और ज्यादा खतरनाक होता जा रहा है। फोटो देखकर कोर्ट ने इन्हे जानलेवा बताते हुए नाराजगी जाहिर करते कहा कि 2023 में कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी किया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट भी आदेश दे चुका है, लेकिन कोई काम नहीं हो रहा है। एनएचएआइ बताए कि 2023 के बाद क्या काम किए है। कोर्ट का समय खत्म हो रहा था, इसलिए कोर्ट से बायपास की हालत सुधरने तक टोल टैक्स खत्म करने की मांग रखी गई। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई पर इसे सुनने और 7 दिन में गड्ढे खत्म करने के निर्देश दिए।