20 फीट गहराई में लिपटे मिले शव, बाहर पड़े थे कपड़े चप्पल रलायता भोजा की शासकीय डबरी में डूबे 2 चचेरे भाई


उज्जैन। खेत के पास बनी शासकीय डबरी में मंगलवार दोपहर नहाने गये दो नाबालिग चचेरे भाई डूब गये। गांव वालों को खबर मिली तो तलाशी अभियान शुरू किया गया। 20 फीट की गहराई में दोनों के शव लिपटे मिले। देर शाम दोनों को पोस्टमार्टम कराया गया।
भैरवगढ़ थाना एसआई महेन्द्रपालसिंह सेंधव ने बताया कि ग्राम रलायता भोजा में बनी डबरी में शाम 4 बजे के लगभग 2 चचेरे भाईयों रितेश पिता भगवान बागरी 15 साल और आयुष पिता भैरूलाल बागरी 11 साल के डूबने की खबर मिली थी। पुलिस रलायता भोजा पहुंचती उससे पहले गांव वालों ने तलाशी अभियान शुरू कर उनके शव निकाल लिये थे। जिन्हे परिवार अस्पताल लेकर पहुंचा था। मामले में दोनों के मौत की पुष्टि होने पर मर्ग कायम किया गया और शाम 6.30 बजे के लगभग पोस्टमार्टम कराया। परिवार दोनों के शव अंतिम संस्कार के लिये गांव ले गया है। एसआई सेंधव के अनुसार परिजनों से प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि रितेश कक्षा 8 वीं और आयुष कक्षा 5 वीं का छात्र था। दोनों के परिवार का खेत डबरी के पास है। दोनों नहाने के लिये गये थे उनके कपड़े और चप्पल बाहर पड़े मिले है। दोनों को डूबते गांव के एक व्यक्ति ने देखा था। जिसने परिवार और गांव वालों को सूचना दी थी। दोनों चचेरे भाईयों की मौत से परिवार काफी गमगीन हो गया था। आयुष के पिता की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। रितेश के पिता गुमशुम थे, रितेश परिवार का एकलौता पुत्र था।
मांगीलाल ने निकाले दोनों के शव
पोस्टमार्टम के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि 2 सगे भाईयों के दो बच्चों के डूबने की खबर मिलने पर गांव वाले तलाश करने पहुंचे थे। इस दौरान मांगीलाल ने गोता लगाया और 20 फीट की गहराई तक पहुंचा। दोनो चचेरे भाई आपास में लिपटे मिले। मांगीलाल ने दोनों को एक-एक कर बाहर निकाला। आशंका जताई गई कि आयुष के गहराई में जाने पर रितेश उसे बचाने पहुंचा होगा। आयुष ने उसे जकड़ लिया होगा, रितेश को भी तैरना नहीं आता था, जिसके चलते दोनों साथ में डूब है।
2 दिन की बारिश से भरी थी डबरी
पोस्टमार्टम के लिये आये गांव वालों ने बताया कि डबरी शासकीय है, कुछ दिनों पहले ही जेसीबी से गहरीकरण किया था। डबरी में पानी काफी कम था, शनिवार और सोमवार को हुई बारिश के चलते डबरी पूरी तरह से भर गई थी। जिसका पानी काफी मटमैला हो रहा है। तलाशी अभियान के दौरान मटमैले पानी की वजह से तलाश करने वालों को परेशानी का सामान करना पड़ा।

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