प्रशासन कह रहा सफाई हो रही है लेकिन हकीकत तो ये शिप्रा के घाटों पर कचरा पड़ा है 

उज्जैन। प्रतिदिन हजारों की संख्या में बाहर के श्रद्धालु महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन आते हैं तथा शिप्रा नदी में स्नान कर भगवान महाकाल सहित अन्य देवी देवताओं के दर्शन करते हैं लेकिन पिछले कई दिनों से शिप्रा नदी के घाटों की नियमित सफाई नहीं हो रही है इस कारण कई घाटों पर कचरे के ढेर पड़े हुए हैं इधर अधिकारियों का कहना है कि शिप्रा नदी व घाटों की रोज सफाई करवाई जा रही है लेकिन हकीकत तो कुछ और है। शिप्रा नदी के घाटों पर जगह-जगह कचरे के ढेर पड़े देखे जा सकते हैं। ऐसा इसलिए कि जब भी शिप्रा नदी के घाटों की सफाई के बारे में अधिकारियों से बात की जाती है तो उनका यही कहना होता है कि शिप्रा नदी के घाटों की नियमित सफाई हो रही है जबकि हकीकत कुछ और ही है। शुक्रवार को शिप्रा नदी के अंदर कचरा व निर्माल्य सामग्री तैर रही थी वही शिप्रा नदी के घाटों पर भी कचरे का ढेर पड़ा था और ऐसे में ही श्रद्धालु शिप्रा नदी में स्नान कर रहे थे।
 शिप्रा के घाट पर फैली गंदगी की वजह से पूजन आदि कार्य से आने वाले पंडे-पुजारी ओर आम श्रद्धालु परेशान है। शिप्रा नदी के मुख्य घाटों पर भी जगह जगह कचरा पड़ा हुआ है। बाहर से स्नान, पूजन आदि के लिए आ रहे श्रद्धालु में इससे नाराजगी है। लेकिन शिकायत किसको करे और घाट पर उनकी कौन सुने। प्रशासन को ध्यान देकर घाटों की नियमित सफाई करवाना चाहिए। इसके पहले कई बार शिप्रा नदी के घाटों पर फैली गंदगी को देख साधु संतों ने भी नाराजगी जताई थी और उसके बाद अधिकारियों ने घाटों का निरीक्षण कर यहां की सफाई व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे और कहा था की शिप्रा नदी के सभी घाटों की नियमित सफाई की जाएगी। परंतु शुक्रवार को घाटों पर गंदगी व कचरा देखा गया और ऐसे में ही बाहर से आने वाले श्रद्धालु शिप्रा में स्नान कर रहे थे।
बड़ी संख्या में शाम को श्रद्धालु शिप्रा आरती में शामिल होते हैं
वैसे तो शिप्रा नदी के घाटों पर हमेशा लोगों की चहल-पहल रहती है लेकिन शाम को शिप्रा आरती के दौरान लोगों की संख्या बढ़ जाती है शिप्रा आरती में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं लेकिन पिछले कुछ दिनों से घाटों पर गंदगी, पूजा सामग्री के ढेर लगे हुए हैं तथा घाटों पर रखे गए डस्टबिन भी कचरे से लबालब भरे थे।
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