उज्जैन। 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव से पहले शहरों की सीमाओं, वार्डों की संख्या और परिसीमन में बदलाव की प्रक्रिया की तैयारी शुरू हो गई है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 28 सितंबर को प्रदेश के सभी कलेक्टरों को पत्र जारी कर नगरीय क्षेत्रों की सीमावृद्धि, वार्डों की संख्या, वार्ड परिसीमन और आरक्षण आरक्षण से संबंधित प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत उज्जैन नगर निगम में बढते शहरीकरण के तहत 6 वार्ड बढने की संभावना बन रही है।स्थानीय स्तर पर बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए नगरीय निकाय की सीमा बढ़ाने की जरूरत होने पर प्रस्ताव तैयार करने के साथ किसी क्षेत्र को नगरीय सीमा में शामिल या बाहर करने तथा नए नगरीय निकाय के गठन की आवश्यकता संबंधी जानकारी भी मांगी गई है। सभी आवश्यक अभिलेख और जानकारी के साथ स्पष्ट प्रस्ताव 31 अक्टूबर तक आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास को भेजना होगा। इधर जिला शहरी विकास अभिकरण इस जानकारी से अंजान है। उसके प्राधिकृत अधिकारी इसकी जानकारी से अनभिज्ञता जता रहे हैं।उज्जैन में 6 वार्ड बढने की संभावना-उज्जैन के बढते शहरी को देखते हुए यहां पूर्व से ही 6 वार्ड बढने की संभावना तो बनी ही हुई है। इसे लेकर वर्ष 2018 में भी प्रस्ताव नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को भेजा गया था। जिला शहरी विकास अभिकरण की और से इसके बाद भी जानकारियों की मांग पर प्रस्ताव भेजे गए है। पिछले 8 वर्षों में इसके बाद भी बढते शहरीकरण में कालोनियों का फैलाव होता रहा है। बराबर इंदौर रोड,बडनगर बायपास रोड के साथ ही देवास रोड एवं तराना कानीपुरा रोड के साथ मक्सी रोड एवं आगर रोड के ग्राम पंचायतों तक कालोनियों का फैलाव हुआ है। बडनगर रोड पर भी यही हाल हुए हैं। ऐसे में सामान्य रूप से ही 6 वार्डों के बढने की प्रारंभिक स्थिति ही सामने है। इसके उपरांत बढते शहरीकरण को संज्ञान में लेकर अगर सर्वे के आधार पर कार्रवाई होती है तो वैसे 10-12 नए वार्ड की स्थिति बनना तय है।आसपास की कई ग्राम पंचायतों को उज्जैन नगर निगम में शामिल करने की स्थिति निर्मित हो चुकी है।
क्षेत्र को शामिल करने और हटाने को लेकर बनेगें प्रस्ताव-
शासन के आदेश में मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 और मध्यप्रदेश नगरपालिका निगम अधिनियम 1956 की संबंधित धाराओं का उल्लेख किया गया है। इसमें नगरीय क्षेत्र की सीमाओं के भीतर किसी विनिर्दिष्ट क्षेत्र को शामिल करने या अपवर्जित करने के प्रावधानों के तहत प्रस्ताव तैयार करने की बात कही गई है। साथ ही नगरपालिका और नगर निगमों में वार्डों की संख्या तथा क्षेत्र के निर्धारण और वार्डों के परिसीमन से संबंधित प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि स्थानीय स्तर पर बढ़ते शहरीकरण के फलस्वरूप यदि किसी नगरीय निकाय की सीमावृद्धि की आवश्यकता महसूस होती है तो प्रस्ताव तैयार किया जाए। इसी तरह किसी क्षेत्र को नगरीय निकाय की सीमा में शामिल करने या बाहर करने अथवा नए नगरीय निकाय के गठन की आवश्यकता होने पर उससे संबंधित आवश्यक अभिलेख और जानकारी भी प्रस्ताव में शामिल करना होंगे।
बदलेगी प्रक्रिया से तस्वीर-
शासन के इस निर्देश से आगामी नगरीय चुनाव के पहले निकायों की मौजूदा सीमा और वार्ड संरचना की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि अभी उज्जैन नगर निगम की सीमा बढ़ाने, किसी क्षेत्र को शामिल करने या वाडों की संख्या बदलने का प्रस्ताव तय नहीं हुआ है। यह प्रक्रिया कलेक्टर स्तर से प्रस्ताव तैयार होने के बाद आगे बढ़ेगी। प्रस्तावों में में सीमावृद्धि के साथ वार्ड परिसीमन और आरक्षण से संबंधित जानकारी भी शामिल की जानी है। इसलिए स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले प्रस्ताव आगामी चुनाव की प्रशासनिक तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण होंगे। विभाग ने कलेक्टर को आवश्यक जानकारी और अभिलेख जुटाकर पूर्ण एवं स्पष्ट प्रस्ताव निर्धारित समय-सीमा में भेजने को कहा है। आदेश की प्रतियां राज्य निर्वाचन आयोग, नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त, संभागीय आयुक्तों तथा संबंधित नगरीय निकायों को भी भेजी गई हैं।