15 साल बाद BJP ने बिछाई वार्डों में सियासी बिसात,*  85 वार्डों में संयोजकों की युवाओं मिली कमान

इंदौर। भाजपा ने इंदौर नगर के सभी 85 वार्डों में वार्ड संयोजकों और वार्ड पालकों की घोषणा कर संगठन की जमीनी राजनीति को नई दिशा देने की कोशिश की है। करीब 15 साल बाद हुई इस घोषणा में अधिकांश वार्डों में युवा चेहरों को संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि पूर्व पार्षदों, पूर्व मंडल अध्यक्षों और संगठन में विभिन्न दायित्व निभा चुके वरिष्ठ नेताओं को वार्ड पालक बनाकर समन्वय की भूमिका दी गई है। इस व्यवस्था का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है, क्योंकि पार्टी ने एक ओर नई पीढ़ी को आगे बढ़ने का अवसर दिया है, तो दूसरी ओर अनुभवी नेताओं को संगठन से जोड़े रखते हुए उनकी भूमिका भी तय की है।
 युवाओं की ऊर्जा और वरिष्ठों का अनुभव, संगठन के सामने समन्वय की चुनौती-वार्ड स्तर पर राजनीति की असली ताकत जनता के बीच मौजूदगी और कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद में होती है। युवा वार्ड संयोजकों के सामने अब अपनी सक्रियता साबित करने के साथ वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का लाभ लेने की चुनौती भी रहेगी। वहीं वार्ड पालकों की भूमिका संयोजकों को मार्गदर्शन देने, पुराने और नए कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बनाने तथा स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण होगी। यदि दोनों के बीच बेहतर समन्वय बनता है, तो वार्डों से उठने वाली समस्याओं और कार्यकर्ताओं की बात को संगठन के वरिष्ठ नेतृत्व तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकेगा।
 *जनता और संगठन के बीच अहम कड़ी होते हैं वार्ड संयोजक-किसी भी राजनीतिक दल में वार्ड संयोजक की भूमिका केवल पार्टी के कार्यक्रम आयोजित कराने तक सीमित नहीं होती। वह जनता की समस्याओं, स्थानीय कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं और क्षेत्र में पार्टी की स्थिति से संगठन को अवगत कराने वाली महत्वपूर्ण कड़ी होता है। सड़क, पानी, सफाई, बिजली सहित स्थानीय मुद्दों पर नागरिकों की आवाज को उचित मंच तक पहुंचाना और पार्टी की नीतियों व कार्यक्रमों को जनता के बीच ले जाना भी इसी जिम्मेदारी का हिस्सा है। ऐसे में संयोजक और वार्ड पालक के बीच तालमेल जितना मजबूत होगा, संगठन और आम नागरिकों के बीच संवाद उतना ही प्रभावी हो सकेगा।नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा की ओर से जारी सूची को संगठन में नई जिम्मेदारियों के बंटवारे के साथ नई पीढ़ी को अवसर देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। अब इन नियुक्तियों की वास्तविक परीक्षा बैठकों और संगठनात्मक कार्यक्रमों से आगे बढ़कर जनता के बीच सक्रियता, कार्यकर्ताओं के साथ व्यवहार और स्थानीय समस्याओं पर पहल से होगी।15 साल बाद बनी इस नई व्यवस्था में भाजपा ने युवाओं को आगे बढ़ाने के साथ वरिष्ठों के अनुभव को भी महत्व दिया है। अब देखना होगा कि यह तालमेल वार्ड स्तर पर संगठन को कितना मजबूत करता है और जनता की आवाज पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने में कितनी प्रभावी भूमिका निभाता है।
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