हाथ लकडिया चंदन की जै बोलो यशोदा नंदन की … हीरामिल गेट से पंचक्रोशी यात्रियों ने किया नगर प्रवेश पंचक्रोशी यात्रियों के स्वागत कर धर्मालुओं ने की सेवा -आस्था की 118 किलोमीटर यात्रा कर कर्कराजेश्वर रेती घाट पहुंचे,आज अष्टतीर्थी यात्रा करेंगे

 

उज्जैन। गुरूवार को सुबह से पंचक्रोशी यात्रियों के नगर प्रवेश का क्रम शुरू हो गया था लेकिन यात्री इक्का-दुक्का ही आ रहे थे। दोपहर में 118 किलोमीटर की पंचक्रोशी यात्रा पूर्ण कर यात्रियों के जत्थों ने नगर प्रवेश किया। इस दौरान यात्री काफी जोश में दिखे और पूरे उत्साह से भजन गाते,नाचते उन्होंने नगर में प्रवेश किया। शहर के धर्मालुजनों ने भी उनका गर्मजोशी से स्वागत कर सेवा की।

विधि विधान से इस वर्ष पंचक्रोशी यात्रा की शुरूआत 10 अप्रेल से हुई थी। वैसे तो यात्री सप्तमी एवं अष्टमी से ही रवाना होना शुरू हो गए थे। सभी यात्रियों ने गुरूवार को नगर प्रवेश किया है। देर शाम तक श्रद्धालुओं के इक्का –दुक्का रूप से नगर प्रवेश का क्रम जारी रहा। सभी यात्री नगर प्रवेश के साथ ही रेती घाट कर्कराजेश्वर की और पहुंच रहे थे। शुक्रवार को यात्री अष्टतीर्थी यात्रा करेंगे। इसमें यात्री उत्तर वाहिनी के किनारे चलते हुए आठ तीर्थों के दर्शन के लाभ लेंगे। मंगलनाथ पर यात्रा पूर्ण होगी।

दो दिनों से नगर प्रवेश जारी-

इस वर्ष भी यात्री निश्चित तिथि वैशाख मास कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि से पूर्व ही शुरू हो गई थी। इसके चलते यात्रियों के नगर प्रवेश का क्रम भी बुधवार से ही शुरू हो चुका है। कम –कम संख्या में छोटे-छोटे ग्रुप यात्रियों का आगमन बना हुआ है। गुरूवार दोपहर को सर्वाधिक यात्रियों ने नगर प्रवेश किया है। ये एक बडे जत्थे के रूप में नगर प्रवेश करने पहुंचे और हीरामिल गेट से यात्रियों ने नगर में प्रवेश किया।

आगे बैंड पिछे सिर पर पोटली और यात्री-

नगर प्रवेश के पूर्व यात्रियों ने हीरा मिल चाल के वहां रूक कर कुछ देर विश्राम किया। यहां क्षेत्रीय धर्मालुओं के साथ ही अन्य ने मिलकर यात्रियों को शीतल जल की सेवा दी। इसके साथ ही यात्रियों को स्वल्पाहार के रूप में ककडी,चाय एवं अन्य खाद्य सामग्री भी वितरित की गई। दोपहर में ही चाल से हीरामिल गेट के बीच बैंड की धून बजने लगी और उसके बाद यात्री जत्थे के रूप में उसके पीछे –पीछे हो लिए। इस दौरान आगर रोड पर एक साईड पूरी तरह से यात्रियों से पट गई थी। यात्री जुलूस के रूप में नगर में आगे बढते गए और मालीपुरा होते हुए कर्कराजेश्वर की और रवाना हुए।

कई यात्रियों ने दर्शन कर भगवान को बल लौटाया-

यात्रा से लौटकर आ रहे कई यात्रियों ने गुरूवार को ही पटनी बाजार स्थित भगवान श्री नागचंद्रेश्वर के दर्शन किए । इस दौरान भगवान को प्रतिकात्मक घोडे और नारियल अर्पित कर यात्रा के लिए प्राप्त बल की वापसी का धन्यवाद दिया गया। यहां से कई श्रद्धालु अपने गंतव्य को रवाना हो गए हैं। शिप्रा नदी के रेती घाट सहित अन्य घाटों पर भी पंचक्रोशी यात्रियों का अच्छा खासा जमावडा देखा गया है। शुक्रवार को उत्तरवाहिनी में आस्था की डुबकी लगाने के बाद यात्री अष्टतीर्थी यात्रा की शुरुआत करेंगे। इस वर्ष यात्रियों के साथ उज्जैन नगर निगम महापौर पवित्र नदियों का जल लेकर विधि विधान से पंचक्रोशी यात्रा पर निकले थे। उन्होंने भी पैदल चलकर यात्रा को पूर्ण किया। गुरुवार को महापौर ने यात्रियों के साथ ही नगर प्रवेश किया । इस दौरान हीरा मिल स्थित जैन मंदिर के सामने नगर निगम स्वागत मंच के माध्यम से पार्षदों द्वारा महापौर का पुष्पमाला एवं पुष्प वर्षा करते हुए स्वागत किया गया।

चार द्वारपालों के दर्शन किए-

पंचक्रोशी यात्रा के दौरान यात्रियों ने 84 महादेव में से पिंगलेश्वर, कायावरूहणेश्वर,बिलकेश्वर एवं दुर्देश्वर भगवान के दर्शन किए हैं। वैशाख मास में इनके दर्शनों का विशेष महत्व उल्लेखित है। इस यात्रा में अंचल के श्रद्धालु बडी संख्या में शामिल होते हैं।

Share:

संबंधित समाचार

Leave a Comment