खुसूर-फुसूर नए साहब काफी कुछ बदलें तो स्वास्थ्य सुधार संभव…

खुसूर-फुसूर नए साहब काफी कुछ बदलें तो स्वास्थ्य सुधार संभव…कई बार खिलाडी के अच्छा होने के बाद भी उसका प्रदर्शन ठीक नहीं हो पाता है। मौका आने पर भी उसे प्रदर्शन में दिक्कत आ जाती है। देखने वाले खिलाडी में ही कमी निकालते हैं ये नहीं देखा जाता है कि मैदान में भी कहीं कुछ समस्या रही जिसकी वजह से प्रदर्शन मन माफिक नहीं हो सका है। इसमें कई बार प्रदर्शन करने वाले खिलाडी के खरीदे गए जूते भी समस्या खडी कर देते हैं। हाल ही में जिले के स्वास्थ्य विभाग की कमान युवा अधिकारी के हाथ में सौंपी गई है। वैसे तो यह सब प्रशासनिक हस्तक्षेप से हुआ है। स्वास्थ्य विभाग का मुख्यालय निर्णय लेने में अक्षमता दर्शा रहा था और देर-दार कर रहा था ऐसे में जिले के प्रशासनिक मुखिया ने ही निर्णय लेते हुए युवा अधिकारी को साफा बांध दिया। वैसे युवा अधिकारी काफी योग्य हैं और कर्मठ भी हैं। पूर्व से ही शासन के साथ प्रशासन में समन्वय बनाकर काम करने के आदि हैं। जिम्मेदारी संभालने के साथ ही उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर कामों को निपटाना शुरू कर दिया है। आते ही संलग्नीकरण के निपटारा कर दिया। यही नहीं शहर एवं जिले में फर्जी क्लीनिक एवं अन्य संस्थानों पर कसावट कर दी है। खुसूर-फुसूर है कि नए साहब को अगर बेहतर स्वास्थ्य बनाकर रखना है तो उन्हें पंजीयन शाखा का भी आडिट करना होगा और इसके साथ ही कुर्सियों की रद्दोबदल करना बहुत ही आवश्यक हो गया है। वर्षों से कुछ कुर्सियां एक ही स्थान पर जमी हुई हैं। इन्होंने मात्र अवसरों का लाभ ही लिया है। इनके कार्य की शैली अपने तईं ही होती है। नियम और कानून की बजाय ये जिधर दम उधर हम के हालातों में जमे रहे हैं। जांच करने वालों की दुकान से काफी गलबैंया के हालात यहां बने हुए हैं।

 

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