खुसूर-फुसूरदुरूपयोग न हो जाए तफ्तीश के दौरान का मामला…वर्दी हमारी सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था के पालन के लिए है। इसकी कार्यप्रणाली लोकतंत्र में कानून व्यवस्था को बनाए रखना एवं आमजन के आपराधिक कृत्यों की रोकथाम के साथ ऐसे लोगों पर कार्रवाई करना है। हाल ही के दिनों में दो-चार दिनों के आगे पीछे जिले के दो आरक्षी केंद्रों के तहत वर्दी पर अपने कर्म के दौरान हमले के मामले सामने आए हैं। इस तरह के मामलों में पूरी सख्ती के साथ कार्रवाई की जाना चाहिए। इस तरह के दु:साहसी लोगों पर नियम एवं कानून के तहत कार्रवाई की जाना आवश्यक है। ऐसे आरोपियों पर कार्रवाई के दौरान तफ्तीश करते समय इस बात का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए कि जिन कर्मियों के साथ आपराधिक कृत्य की स्थिति ऐसे लोगों ने निर्मित की थी उन्हें तफ्तीश के दौरान सार्वजनिक कार्रवाई के दौरान कतई शामिल नहीं किया जाना चाहिए। उसके पीछे के कई विधिक कारण भविष्य में अपराधी को राहत मिलने में कारगर हो सकते हैं। प्रभावित वर्दी धारी के इस दौरान शामिल रहने पर यह भी मुद्दा बन सकता है कि उसने कार्रवाई में पूर्वाग्रह और दुराग्रह से द्वेष निकाला और सार्वजनिक की गई कार्रवाई का दुरूपयोग किया गया । आधुनिक युग के स्क्रीन शाट,रेकार्डिंग और विडियों से विधिक प्रक्रिया के दौरान इससे सवालिया निशान खडे होना लाजिमी है। खुसूर-फुसूर है कि हाल ही के घटनाक्रम में सोश्यल मिडिया में वायरल हो रहे ग्रामीण क्षेत्र के मामले में सार्वजनिक कार्रवाई के दौरान ग्रामीण अंचल में प्रभावित टू स्टार भी उसमें शामिल रहे। उनकी कार्रवाई को इसी दायरे में देखा जा रहा है और इस पर सवाल भी खडे किए जा रहे हैं। विधिक स्थिति में ऐसे विडियो का उपयोग भी किया जा सकता है। ऐसे मामलों में पूर्व से ही कई सारे निर्णय हैं और अगर उसमें पूर्वाग्रह और दुराग्रह सामने आता है तो आरोपित के लिए वह विधिक प्रक्रिया में हितकर हो जाता है जिसका लाभ लेते हुए वह अपने आप को निर्दोष प्रमाणित करने की पहल कर सकता है। इससे वर्दी के किए कराए पर पानी फिरने की आशंका तो जन्म लेती ही है साथ ही ऐसे आरोपियों के छुटने पर अन्य भी ऐसे अपराध की हिमाकत करने लगते हैं।