रतलाम में कार्रवाई पांच झोलाछाप पर एफआईआर ,उज्जैन में इंतजार विवादित उपचार से मौत का 15 दिन में दुसरा मामला -बगैर पंजीयन के ही क्लिनिक संचालित किया जा रहा था,स्वास्थ्य विभाग बेखबर रहा

उज्जैन। संभागीय मुख्यालय उज्जैन पर स्वास्थ्य सेवाओं के हाल यह हैं कि विवादित उपचार से मरीज की मौत का 15 दिन में ही दुसरा मामला सामने आया है। पास के जिले में निरंतर कार्रवाई के तहत एक बार फिर से 5 झोलाछाप पर एफआईआर दर्ज की गई है,जबकि उज्जैन में बगैर पंजीयन के ही अस्पताल संचालित किया जा रहा था। यहां पर आपरेशन के दौरान ही 12 वर्षीय बच्ची दिपिका की शनिवार को मौत हो गई।जिला मुख्यालय पर स्वास्थ्य सेवाओं के हाल बिगडे पडे हैं। स्वास्थ्य प्रशासन का प्रायवेट क्लिनिक एवं अस्पतालों पर नियंत्रण नहीं हैं। इसके चलते मरीजों की जान के साथ खिलवाड के मामले बढते जा रहे हैं। शनिवार को मंछामन गणेश क्षेत्र में जनसेवा नोबल अस्पताल में बच्ची की मौत के मामले से पहले 22 अप्रेल को फ्रीगंज के एमपी हॉस्पिटल में युवक की मौत के बाद हंगामा हुआ था। परिजनो ने अस्पताल प्रबंधन की शिकायत की थी।बच्ची का बिसरा जांच के लिए भेजा-शनिवार को अपेंडिक्स के आपरेशन के दौरान महिदपुर के टिलियाखेडी निवासी दिपिका पिता मेहरबान की जनसेवा नोबल पालि क्लिनिक में मौत हुई थी। रविवार को बच्ची का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सुपूर्द किया गया है। सीएमएचओं डा.अशोक पटेल के अनुसार बिसरा जांच के लिए भेजा गया है। अस्ताल अपंजीकृत था उसे सील किया गया है। पुलिस ने मर्ग जांच के उपरांत अस्पताल संचालक राजेश चौहान के विरूद्ध गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर जांच में लिया है। थाना प्रभारी तरूण कुरील के अनुसार क्लीनिक का पंजीयन था उस पर अस्पताल संचालित किया जा रहा था। प्रकरण जांच में आरोपी को गिरफ्तार करते हुए उसके सहयोगी अन्य को आरोपी बनाया जाएगा।रतलाम के सरवन में 5 खिलाफ एफआईआर-आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सरवन थाना पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए क्षेत्र के पांच कथित डॉक्टरों के खिलाफ मध्य प्रदेश राज्य आयुर्विज्ञान अधिनियम 1956/1958 की धारा 24 के तहत मामला दर्ज किया है।प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरवन के चिकित्सा अधिकारी बीएमओ डॉ. रविन्द्र डामोर की लिखित शिकायत पर पुलिस ने सरवन क्षेत्र में अवैध रूप से क्लीनिक संचालित कर रहे आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया। पुलिस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, आरोपियों में फर्जी डॉक्टर मुकेश निनामा निवासी सदर बाजार सरवन, अवनी कुमार टिकादार निवासी बांसवाड़ा रोड सरवन, चन्द्रप्रकाश जोशी निवासी सैलाना और संजय बिसवास निवासी कुण्डा थाना सरवन शामिल हैं। इन सभी पर बिना किसी वैध डिग्री या पंजीयन के एलोपैथिक पद्धति से उपचार करने और लोगों की जान जोखिम में डालने का आरोप है। इसी तरह बेड़दा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. नितेश कुमार जोशी ने पुलिस को बताया कि 05 मई को जाँच के दौरान धन्नालाल डोडिया निवासी सेमलिया, थाना नामली ग्राम बेड़दा स्थित केदारेश्वर महादेव मेडिकल जनरल स्टोर पर अवैध रूप से डॉक्टरी करते पाया गया। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर धन्नालाल के विरुद्ध भी पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया है।फाइल में मिली गड़बड़ियां अब तक कार्रवाई नहीं- उज्जैन के फ्रीगंज स्थित एमपी हॉस्पिटल में 22 अप्रैल को मरीज की मौत के मामले में परिजनो ने अस्पताल प्रबंधन की शिकायत की थी। इस मामले में सीएमएचओ के निर्देश पर डॉक्टरों के दल ने जांच की थी और गडबडियां मिली थी,लेकिन कार्रवाई नहीं हुई है। बाइक सवार प्रताप आंजना को महामृत्युंजय द्वार के पास अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी। जिसके बाद कुछ लोगों ने उनकी मदद की और उन्हें एमपी अस्पताल में भर्ती कराया था।युवक को हाथ पैर में फ्रेक्चर था। अचानक डॉक्टरों ने बताया कि उसकी मौत हो चुकी है। जांच के लिए एमपी अस्पताल पहुंची टीम के डॉ. विक्रम रघुवंशी, डॉ. प्रदीप सोमेश, डॉ. अजय दंडोतिया, डॉ. आदित्य रावल सहित विकास राजपूत ने मरीज की फाइल देखी तो गड़बड़ी उसमें मिली। डॉक्टरों की टीम ने अस्पताल प्रबंधन से पूछा कि 6 बजे डेथ डिक्लियर कर दी तो 6:30 बजे मरीज को क्यों चेक कर रहे थे। मरीज की मौत होने के बाद भी ड्यूटी डॉक्टर के साइन नहीं है। हालांकि, मामले में अस्पताल प्रबंधन ने जांच टीम को कोई जवाब नहीं दिया था। जांच दल ने रिपोर्ट से सीएमएचओं को अवगत करवा दिया था।

 

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