ब्यावरा। ब्राह्मण समाज द्वारा आराध्य देव भगवान श्रीपरशुरामजी का जन्मोत्सव अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। पूरे शहर में उत्सवी माहौल नजर आया और समाजजनों में खासा उत्साह देखने को मिला। जन्मोत्सव के अवसर पर विशाल चल समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें ब्राह्मण समाज के पुरुष, महिलाएं और बच्चों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। चल समारोह की शुरूआत नगर के वैष्णोदेवी मंदिर से हुई, जहां सुबह से ही विप्र बंधुओं का जुटना प्रारंभ हो गया था। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान परशुराम की पूजा-अर्चना की। इसके बाद उपस्थित सभी समाजजनों को भगवा साफा पहनाकर एकजुटता और धर्म के प्रति आस्था का संदेश दिया गया। बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के साथ सुसज्जित रथ में भगवान परशुराम की आकर्षक झांकी सजाई गई, जिसने सभी का मन मोह लिया।
जयकारों से गूंजा शहर
चल समारोह जैसे ही शहर के मुख्य मार्गों से गुजरा, भगवान परशुराम की जय के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। युवा, बुजुर्ग और बच्चे पूरे उत्साह के साथ शामिल हुए और अनुशासन के साथ यात्रा को आगे बढ़ाते रहे। मार्ग में श्रद्धालु जगह-जगह फूलों की वर्षा कर भगवान की झांकी का स्वागत करते नजर आए।
कई स्थानों पर हुआ भव्य स्वागत
सुबह करीब 10 बजे प्रारंभ हुआ यह चल समारोह वैष्णो देवी मंदिर से निकलकर एबी रोड, सिटी थाना, चिंताहरण हनुमान मंदिर, पीपल चौराहा, मुख्य बाजार, नगर पालिका परिसर, एबी रोड, अहिंसा द्वार होते हुए इंदौर नाका से भगवान परशुराम धाम मंदिर पहुंचा। इस दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और आम नागरिकों द्वारा जगह-जगह स्वागत मंच लगाकर शोभायात्रा का भव्य अभिनंदन किया गया। कहीं शीतल पेय वितरित किए गए तो कहीं पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाया गया।
महाआरती के साथ हुआ समापन
भगवान परशुराम धाम मंदिर पहुंचने पर विधिवत महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। आरती के साथ ही पूरे आयोजन का धार्मिक वातावरण में समापन हुआ।
दिए संस्कार और शिक्षा के संदेश
चल समारोह के पश्चात मंदिर परिसर में भव्य मंचीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें समाज के पदाधिकारी, धर्मगुरु और गणमान्य नागरिकों ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने, उन्हें शिक्षा के प्रति जागरूक बनाने और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज सदैव सभी समाजों को साथ लेकर चलने की परंपरा निभाता आया है और यही भावना नई पीढ़ी में भी विकसित की जानी चाहिए। वक्ताओं ने यह भी कहा कि बच्चों को कर्मकांड, परंपराओं और संस्कृति का ज्ञान देना आवश्यक है, ताकि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें। साथ ही, आधुनिक शिक्षा के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर और सक्षम बनाना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को बुराइयों और कुरीतियों से दूर रखते हुए उन्हें सही मार्गदर्शन दें।
सामाजिक एकता का दिखा संदेश्:
पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, एकता और सामाजिक समरसता की झलक स्पष्ट रूप से देखने को मिली। इस भव्य आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि समाज में एकजुटता और संस्कारों के महत्व का भी संदेश दिया।
भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर निकला भव्य चल समारोह, जयकारों से गूंजा शहर