पुराने महाकाल थाना के पास पारंपरिक निर्माण सामग्री से बराबर कामजारी था पुरातन द्वार का सडक की गहरी खुदाई के दौरान 14वीं सदी का ऐतिहासिक महाकाल द्वार ढहा स्मार्ट सिटी देख रहा है यहां बडा काम सडक एवं रिटेनिंग वाल के साथ द्वार जिर्णोद्घार

 

उज्जैन। 14 वीं सदी के पुरातन महाकाल द्वार का जिर्णोद्धार पारंपरिक निर्माण सामग्री से जारी था। इसी दरमियान पास में सडक के निर्माण के लिए गहरी खुदाई की गई थी। यहां रिटेनिंग वाल का निर्माण भी जारी है। इसी दौरान शनिवार –रविवार रात को महाकाल मंदिर से रामघाट जाने वाले प्राचीन मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक महाकाल द्वार ढह गया। यह काम करोडों की लागत से चल रहा है।द्वार ढहने की सूचना पर रविवार सुबह स्मार्ट सिटी के अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। सीईओ संदीप शिवा के अनुसार महाकाल द्वार के समीप सडक निर्माण कार्य के दौरान खुदाई चल रही है। यहां स्टीवेशन किया गया था। रिटेनिंग वाल बनाते हुए जिर्णोद्धार का काम चल ही रहा था। बडा काम 22 करोड की रोड का है। उसी के तहत द्वार का भी रिनोवेशन जारी था अभी उसमें कुछ काम किया गया था। पूरा क्षेत्र बेरिकेडस से पैक था जिससे की इसमें आवाजाही न हो सके। नए सिरे से पुरातन स्वरूप में ही महाकाल द्वार बनाया जाएगा।बारिश के कारण संभावित-पिछले दिनों हुई बारिश के कारण मिट्टी में नमी बढ़ने और जमीन के सेटलमेंट की वजह से द्वार की संरचना प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। कार्यपालन यंत्री कमल सक्सेना ने मिडिया को बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, द्वार के ढहने की स्थि‍ति रात में हुई है। आसपास सडक के लिए खुदाई का काम चल रहा था। ऐसे में जमीन के धंसने यानी सेटलमेंट के कारण द्वार के गिरने की आशंका है। उन्होंने बताया कि हादसे में किसी प्रकार की जनहानि या अन्य नुकसान की जानकारी नहीं है। महाकाल मंदिर से करीब 100 मीटर दूर स्थित यह द्वार रामघाट जाने वाले पुराने मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लंबे समय से जीर्ण-शीर्ण स्थिति में होने के कारण यह रास्ता बंद था। आधुनिक की बजाय परंपरागत निर्माण सामग्री-इस द्वार के जीर्णोद्धार में आधुनिक सीमेंट के बजाय पारंपरिक चूना तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा था। चंदेरी और ललितपुर से आए कारीगर चूना, गुड़, मैथी, गूगल, उड़द के पानी, ईंट के चूरे और रेत जैसे पारंपरिक मिश्रण से निर्माण कार्य कर रहे थे। द्वार के गिरने के बाद अब निर्माण गुणवत्ता, आसपास चल रही खुदाई और जमीन की स्थिति को लेकर जांच की जा रही है।14 वीं शताब्दी ईस्वी का द्वार-श्री महाकालेश्वर मंदिर के उत्तर में स्थित यह स्थान महाकाल द्वार के नाम से जाना जाता है। यह द्वार लगभग 14वीं शताब्दी ईस्वी के आरंभ का माना जाता है। महाकाल द्वार ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और इसे मध्यकालीन काल से रामघाट और महाकाल मंदिर के बीच संपर्क मार्ग के रूप में उपयोग किया जाता रहा है। इसका निर्माण बेसाल्ट पत्थर और ईंटों से किया गया है। महाकाल द्वार परिसर में एक मेहराबदार प्रवेश द्वार, पत्थर की सीढ़ियां, मंदिर से प्राप्त नक्काशीदार पत्थरों के अवशेष और एक पुराना मार्ग है। सदियों से इस द्वार का उपयोग स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों द्वारा रामघाट को महाकालेश्वर मंदिर से जोड़ने वाले मार्ग के रूप में किया जाता रहा है। इसकी स्थापत्य विशेषताओं से पता चलता है कि मध्ययुग में दिल्ली के तीसरे सुल्तान द्वारा किए गए विनाश के बाद इस स्थल का अलग-अलग कालखंडों में जीर्णोद्धार हुआ। 18वीं शताब्दी में सिंधिया शासन के दौरान और आधुनिक दौर में सिंहस्थ कुंभ (2004) के समय भी यहां पुनरुद्धार कार्य किए गए।

Share:

संबंधित समाचार

Leave a Comment