उज्जैन। उज्जैन विकास प्राधिकरण की व्यवसायिक योजना जमीन पर आते ही फूस्स हो गई है।“चौबे जी छब्बे जी बनने गए दुबे जी रह गए” वाले हाल कायम हो गए हैं। शिप्रा विहार क्षेत्र में इसे करीब 50करोड रूपए से अधिक व्यय कर अंजाम दिया गया था लेकिन योजना पूर्ण होने के उपरांत इसमें एक भी भूखंड नहीं बिक सका है। हाल यह हैं कि “सोने से घडावन” महंगी साबित हो रही है और योजना के निर्माणों के रखरखाव में भी जमकर खर्च किया जा रहा है।विकास प्राधिकरण वर्ष 2023-24 के दौरान व्यवसायिक योजना को शिप्रा विहार के अंतर्गत कमर्शियल प्रोजेक्ट के रूप में इंदौर रोड एवं देवास रोड के मध्य में अमल में लाया था। तत्कालीन अध्यक्ष श्याम बसंल के दौर में इस पर काम शुरू किया गया था। प्रोजेक्ट की जानकारी को भी जमकर हाईटेक बनाया गया था। यहां तक की इस पूरे प्रोजेक्ट की जानकारी का विडियो देखने के लिए भी क्यू आर कोड अपडेट किया गया था जिसके स्केन करते ही पूरे प्रोजेक्ट का विडियो सामने आ जाता था।बाह्य मार्ग 45 मीटर,आंतरिक15 मीटर-इस पूरे प्रोजेक्ट को विकास प्राधिकरण ने 45 मीटर एवं 30 मीटर बाहरी सडकें तथा 24 मीटर एवं 18 मीटर की आंतरिक सडक पर इसे अंजाम दिया है। प्रोजेक्ट में अंडरग्राउंड विद्युतीकरण ,सीवर लाईन,स्टार्म वाटर लाईन,जलप्रदाय लाईन दी गई है। यहां रोड डिवाईडर भी आकर्षक देने का वादा किया गया । इसके साथ ही अत्याधुनिक स्ट्रीट लाईट ,फूटपाथ से सुसज्जित किया गया। यही नहीं 1.5 लाख वर्गफूट का पूर्णत: विकसित गार्डन और 2.5 हेक्टेयर का ग्रीन स्पेस भी यहां योजना में अंजाम दिया गया है।एक प्लॉट भी नहीं बिका-योजना को लेकर बताया जा रहा है कि विकास प्राधिकरण इसे अमल में लाने के बाद से यहां के व्यवसायिक भूखंडों को बेचने के सभी प्रकार के प्रयास कर चुका है लेकिन हाल यह हैं कि योजना का एक भी भूखंड व्यवसायिक दरों पर बिकने एवं कोई खरीदने को तैयार नहीं हुआ है। शिप्रा विहार योजना में छोटे बडे कुल 173 प्लॉट काटे गए, कीमत 3 करोड़ से 35 करोड़ तक रखी गई है।इनका विक्रय लाटरी और निविदा के नियमों से किया जाना है। परिसर में व्यावसायिक प्लॉट के आसपास 30,24 व 14 मीटर चौड़ी पक्की सडकें बनाई गई हैं।संधारण व्यय भी बडा-यूडीए ने प्रोजेक्ट के प्रारंभिक दौर में रातों रात करोडों रूपए कमाने का स्वप्न तो देखा था लेकिन योजना के इस तरह से फ्लाप होने को लेकर किसी ने उम्मीद नहीं की थी। सडकों के साथ तमाम सुविधाओं के निर्माण पर किए गए खर्च के बाद अब यहां संधारण पर किया जा रहा व्यय प्रतिमाह ही विकास प्राधिकरण के लिए सिरदर्द खडा कर रहा है। अगर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की बातों पर ही विश्वास किया जाए तो देखरेख के लिए ही यहां रखे गए कर्मचारी और गार्डन सहित अन्य कामों के लिए ही प्रतिमाह 10 लाख से अधिक का खर्च होना संभावित माना जा सकता है।दर और गाईड लाईन में अंतर-शहर में प्रापर्टी में जमीन और भूखंडों के व्यवसाय से जूडे सूत्रों की बातों पर अगर विश्वास किया जाए तो उनका कहना है कि यह मसला कुछ पेचिदा खूद विकास प्राधिकरण ने ही बनाकर सामने रखा है। क्षेत्र की गाईड लाईन करीब 6 हजार रूपए के लगभग है।इसकी अपेक्षा यूडीए कमर्शियल योजना के मान से रेट 14-15 हजार रूपए तय कर निविदा में आ रहा है। ऐसे में कोई भी व्यवसायि आखिर अभी से इतना महंगा माल क्यों लेगा। धंधे का ऊसूल कहता है कि आज के रेट में माल लेकर रखा जाता है और भविष्य में उससे लाभ लिया जाता है। अब इस योजना में तो अगले 5 साल तक रेट विकास प्राधिकरण की दर वाला आएगा तो ऐसे में पैसा लगाने वाले को अगले पांच साल में क्या मिलेगा। व्यवसायियों के मुताबिक कम से कम लगाए गए पैसे के ब्याज की पूर्ति वाला मामला भी हर वर्ष का रहे तो भूखंड लिया जा सकता है । शहर में ही कई ऐसे व्यवसायी हैं जो इसकी खरीदी कर सकते हैं पर परेशानी वही हैं कि अन्य क्षेत्रों में इससे कम दर पर आवासीय में ही बेहतर लाभ सामने आ रहे हैं । ऐसे में इनकी योजना को लेकर रूझान कमजोर ही रहना है।इंदौर रोड मुख्य मार्ग की दर- व्यवसायियों का कहना है कि योजना में इंदौर रोड मुख्य मार्ग से मिलती जुलती दर पर इनके भूखंड हैं। ऐसे में मुख्य मार्ग पर ही व्यय करना ज्यादा बेहतर है।
उज्जैन विकास प्राधिकरण की शिप्रा विहार व्यवसायिक योजना “चौबे जी छब्बे जी बनने गए दुबे जी रह गए”…! -50 करोड से अधिक खर्च किए और अब संधारण पर प्रतिमाह लाखों का व्यय