उज्जैन। 20 साल से अधिक समय से एक ही मांग ट्रांसपोर्ट नगर की। भीड़ व ट्रैफिक के लिए कई प्रोजेक्ट बनाए गए लेकिन लोडिंग-भारी वाहनों के लिए शहर से बाहर का कोई इंतजाम नहीं। अब तो सरकार से शहर के ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों की एक ही आस है कि ट्रांसपोर्ट नगर को कागज में नहीं दिखाया जाए ,धरातल पर लाया जाए। अंतिम बार लालपुर के यहां जमीन तो दिखा दी गई लेकिन उस पर अमल के हालात पूर्ववत ही हैं।शहर में ट्रांसपोर्ट नगर की मांग करते हुए दुसरी पीढी व्यवसाय संचालन में उतर गई है और वह भी अब थकने लगी है। ट्रांसपोटर् नगर के लिए कई ज्ञापन और अन्यानेक मशक्कत के बाद भी यह धरातल पर नहीं उतर सका है। दो दशक पूर्व श्री सिंथेटिक्स के पास में इसके लिए भूमिपूजन कर दिया गया था लेकिन उस पर आज तक अमल नहीं हो सका। उसके बाद 5 अन्य स्थानों को अंतिम रूप देते देते ही हर बार ट्रांसपोर्ट नगर कागजों में दफन होकर रह गया।
एक सौगात की मांग-ट्रांसपोर्ट व्यवसायी कहते हैं कि शहर में मुख्यमंत्री हर क्षेत्र में सौगात दे रहे हैं। हमने हर बार की तरह उन तक बात पहुंचाई थी । कुछ माह पूर्व लालपुर के पास एक जमीन दिखाई गई। बैठक की गई लेकिन उसके बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया,जबकि हमारे बाद में जिन मुद्दों पर बात हुई उस पर अमल होना शुरू हो गया और मुख्यमंत्री जी ने भूमिपूजन भी कर दिया। हमारी मांग तो दो दशक से पुरानी है और शहर हित में ही है। अगर ट्रांसपोर्ट नगर शहर से बाहर होता है तो दुर्घटनाओं का खतरा भी कम हो जाएगा इसके साथ ही रोजगार की उपलब्धता भी इस क्षेत्र में बढेगी।
3 दशक में 6 स्थान-करीब ढाई दशक पूर्व ट्रांसपोर्ट नगर का जिन्न बोतल से बाहर निकला था। उस दौरान श्री सिंथेटिक्स के पास में जमीन का चयन कर वहां भूमिपूजन किया गया था। तत्कालीन विधायक पारस जैन भी उसमें शामिल हुए थे। तब ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष के बतौर अशोक जैन दुध तलाई वाले काम देख रहे थे। उसके बाद चौपाल सागर,,ढेडिया मेंडिया,धरमबडला,विक्रमनगर के पास जमीनें मात्र औपचारिकता और हर बार उठने वाली मांगों को बर्गलाने के लिए दिखाई गई। अंत में कुछ माह पूर्व लालपुर के पास जमीन दिखाई गई है,लेकिन इस पर भी काम को लेकर अब तक धरातल पर कोई स्थिति सामने नहीं आ रही है।
सिंहस्थ-28 के तहत हो ट्रांसपोर्ट नगर-सिंहस्थ-2028 में भीड़ और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए – सड़क-पुल-पुलिया, रेलवे स्टेशन व हवाई पट्टी तक – कायाकल्प तो किया जा रहा है, लेकिन प्रशासन एक – सबसे बड़े ट्रैफिक पाइंट को भूल रहा है। शहर में लोडिंग और भारी वाहनों के लिए अब तक ट्रांसपोर्ट नगर नहीं बन पाया है।नतीजा अभी भी सैकड़ों ट्रक और भारी वाहन शहर के रिहायशी-व्यापारिक इलाकों और मुख्य सड़कों पर जहां-तहां खड़े रहते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बनने के साथ ही दुर्घटना का अंदेशा भी बना रहता है। अगर सिंहस्थ से पहले ट्रांसपोर्ट नगर के लिए – कदम नहीं उठाए गए या इनके प्रबंधन को लेकर कोई – प्लानिंग नहीं की तो महाकुंभ के दौरान सड़कें लॉक होने का अंदेशा रहेगा।सिंहस्थ तो ठीक अभी ही वाहन लाना मुश्किल-ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के लोगों के अनुसार सिंहस्थ 2028 में तो ठीक अभी ही वाहनों को शहर में लाना बहुत मुश्किल होता जा रहा है। अभी तो हर शनिवार व रविवार को ही दूध तलाई-दौलतगंज आदि क्षेत्रों में वाहनों को ले जाना मुश्किल हो रहा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सिंहस्थ में तो भारी वाहनों का शहर में प्रवेश हो ही नहीं पाएगा। कैसे खाद्यान्न आदि वस्तुओं की सप्लाय होगी, इसके लिए ठोस प्लानिंग करना होगी। सिंहस्थ-16 के दौरान प्रशासनिक दुरदृष्टि से पास की व्यवस्था को अंजाम दिया गया था जिससे मेला क्षेत्र के पंडालों तक वाहन आने जाने में मदद मिल सकी थी।