बोतलों में बिक रहा पानी, शुद्धता की जांच पर तीन साल से ताला बिना जांच कैसे तय होगी पानी की शुद्धता?

 सारंगपुर।गर्मी हो या सफर, होटल-ढाबों से लेकर छोटी दुकानों तक पैक्ड पानी की बोतल हर जगह आसानी से मिल जाती है। बोतल पर छपा नाम और आकर्षक पैकिंग देखकर ग्राहक इसे सुरक्षित मानकर खरीद लेते हैं। लेकिन बोतल के भीतर भरा पानी कहां तैयार हुआ, उसकी गुणवत्ता की जांच कब हुई और वह पीने के लिए कितना सुरक्षित है, इन सवालों के जवाब उपभोक्ता को आसानी से नहीं मिलते। सारंगपुर क्षेत्र में पडताल में पैक्ड पानी की बिक्री और उसकी गुणवत्ता की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं।
नाम अलग-अलग, पानी की शुद्धता का भरोसा किसे-पडताल में होटल, ढाबों और सामान्य दुकानों पर अलग-अलग नामों से पैक्ड पानी की बोतलें मिलीं। कुछ बोतलों के नाम बडे ब्रांड से मिलते-जुलते नजर आए। कई बोतलों पर निर्माता और पानी के स्रोत से जुडी जानकारी को लेकर भी सवाल उठे। ऐसे में केवल बोतल पर छपे नाम के भरोसे पानी को सुरक्षित मान लेना जोखिम भरा हो सकता है। दुकानदारों के मुताबिक, दूसरे ब्रांड की तुलना में सस्ती बोतलें मिलने और मुनाफा अधिक होने के कारण वे इन्हें खरीदते हैं। हालांकि, सस्ती बोतल होना अपने आप में गुणवत्ता खराब होने का प्रमाण नहीं है, लेकिन पानी की शुद्धता की पुष्टि जरूरी है।
तीन साल में एक भी नमूना नहीं, निगरानी पर सवाल-पडताल में सामने आया कि जिले में खाद्य एवं औषधि विभाग ने पिछले तीन साल में पैक्ड पेयजल के नमूने नहीं लिए हैं। पैक्ड पानी बनाने वाली इकाइयों और चिलिंग सेंटरों पर भी इस अवधि में कोई बडी विभागीय कार्रवाई सामने नहीं आई। अन्य तहसील में एक चिलिंग सेंटर बंद किया गया था, लेकिन यह कार्रवाई उस समय हुई थी, जब वहां लोग बीमार पडे थे। इसके बाद पैक्ड पानी की गुणवत्ता को लेकर नियमित जांच और कार्रवाई का कोई बडा मामला सामने नहीं आया। ऐसे में सवाल है कि जब बाजार में पानी की बोतलें लगातार बिक रही हैं, तो उनकी गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है।

बोतल देखकर नहीं, जानकारी देखकर खरीदें पानी-पैक्ड पेयजल खरीदते समय उपभोक्ताओं को बोतल पर निर्माता का नाम-पता, बैच नंबर, निर्माण और उपयोग की अंतिम तारीख, लाइसेंस संबंधी विवरण तथा लागू मानकों से जुडी जानकारी देखनी चाहिए। केवल आकर्षक पैकिंग या ब्रांड से मिलते-जुलते नाम के आधार पर पानी को सुरक्षित नहीं मानना चाहिए। पानी की गुणवत्ता खराब होने पर उल्टी-दस्त, पेट दर्द और संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में शरीर में पानी और जरूरी लवणों की कमी भी हो सकती है। डॉ. अंकित यादव, बाल रोग विशेषज्ञ, सिविल अस्पताल सारंगपुर के अनुसार, दूषित पानी के सेवन से उल्टी-दस्त, पेट दर्द और संक्रमण जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए पानी की गुणवत्ता और उसकी सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खाद्य एवं औषधि निरीक्षक एसएस खत्री ने कहा कि जल्द सारंगपुर क्षेत्र में पानी की जांच के लिए मुहिम चलाई जाएगी।

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