दो मानसून सत्रों में गंभीर डेम की दो स्थिति सामने पिछले वर्ष डेम फूल था,इस वर्ष खाली -मानसून सत्र बीतने पर भी 2250 एमसीएफटी क्षमता के डेम में मात्र659 एमसीएफटी पानी

उज्जैन। उज्जैन की प्यास बुझाने के साथ शिप्रा में तीज त्यौहार पर स्नान के लिए जल प्रबंध को लेकर बनाया गया गंभीर डेम में इस मानसून सत्र के बावजूद मात्र 27 फीसदी पानी है। फसल के दौरान और गर्मी की स्थिति के पनपते ही इसमें जोरदार गिरवट दर्ज होना है। पिछले वर्ष इन दिनों में डेम अपनी पूर्ण क्षमता 483.35 मीटर एवं 2250 एमसीएफटी जल राशि से आच्छादित था। ऐसी स्थिति में शहर को जल निगम की नर्मदा पाईप लाईन के भरोसे ही जलआपूर्ति होना तय है।सन 1980 में गंभीर नदी के घट्टिया तहसील अंतर्गत गांव अंबोदिया में बोरी बंधान के बांध से शुरूआत हुई थी। तत्कालीन दौर में लाल पूल तक पाईप लाईन के माध्यम से पानी लाया गया था और शिप्रा में छोडकर सिंहस्थ के आयोजन में भी उसका उपयोग किया गया था। इसके बाद बोरी बंधान के स्थान पर पक्का बांध बनाने की परियोजना को स्वीकृत किया गया और तीन चरणों में यह परियोजना सिंहस्थ 1992 के पूर्व पूर्ण हुई। सिंहस्थ में पेयजल के साथ स्नान के लिए भी इसी पानी का उपयोग हुआ। यही स्थिति सिंहस्थ 2004 में भी रही।2016 से नर्मदा आई-गंभीर डेम की भरण क्षमता 2250 एमसीएफटीअपने प्रारंभिक काल के विपरित तीन दशकों से ज्यादा समय में कई कारणों से प्रभावित हुई। इसके चलते पेयजल की स्थिति को कायम रखने की प्राथमिकता रखी गई। सिंहस्थ 2016 में नर्मदा का पानी उज्जैन तक शिप्रा के माध्यम से लाया गया और स्नान में उपयोग हुआ।मात्र 27 फिसदी पानी-गंभीर डेम में इस वर्ष कमजोर मानसून के दौर में मात्र 659.055 एमसीएफटी पानी है। वर्तमान में शहर में प्रतिदिन जलप्रदाय के लिए करीब 9 एमसीएफटी पानी की आवश्यकता है।डेम में 100 एमसीएफटी पानी डेड स्टोरेज की स्थिति में रहता है जिसका उपयोग संभव नहीं होता है। फसल के दौरान प्रतिबंध के बावजूद डेम से पानी खिंचने के मामले सामान्य हैं। इसके साथ ही वाष्पीकरण एवं सोखने की स्थिति भी गर्मी बढने के साथ बढेगी। ऐसे में डेम में बमुश्किल 60 दिन का पानी भी शेष नहीं हैं। अभी ठंड,गर्मी का पूरा दौर शेष है। करीब 250 दिनों के बाद ही अगला मानसून सत्र सामने होगा। मावठे के दौर से आस तो है लेकिन वह कितना सार्थक होगा अभी यह पुख्ता तौर पर कोई नहीं कह रहा है।8 घंटे क्षेत्र में बारिश से भर सकता है डेम-तकनीकी रूप से डेम में सालों सेवा देने वाले अधिकारियों का कहना है कि यह इतना गजब तकनीक के साथ बनाया गया है कि अगर डेम क्षेत्र में 8 घंटे 4-6 इंच बारिश हो जाए तो यह अपनी क्षमता से भरने में देर नहीं करता है। इंदौर के यशवंत सागर बांध से इसका सीधा संपर्क है। इंदौर से लेकर उज्जैन क्षेत्र के सभी नाले गंभीर नदी में सीधे तौर पर मिलते हैं। इसके चलते पानी सीधे डेम क्षेत्र में ही आता है। यही कारण है कि पानी एकत्र होने में देर नहीं लगती है और 8 घंटे में 4-6 इंच बारिश में ही डेम भर जाता है। सिंहस्थ 2004 के पूर्व 2003 के मानसून के अंतिम दौर में ऐसा हुआ है।

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