खुसूर-फुसूर
प्रशासकीय मुखिया ने दिया दम…
महाआयोजन की तैयारी में सभी जिम्मेदार लगे हुए हैं। धर्मनगरी में इसके साथ ही पर्यटकों को देव दर्शन में कोई परेशानी न हो इसका भी खयाल रखा जा रहा है। बराबर चिंता के साथ पर्यटकों के लिए सभी व्यवस्थाओं को दुरूस्त रखा जा रहा है। जिले के प्रशासकीय मुखिया इसे लेकर खुद प्रयास कर रहे हैं। अवकाश दिवस होने के बावजूद भी वे मदिरापान वाले देवलोक में श्रद्धालुओं की व्यवस्था एवं निर्माणों की गति देखने पहुंचे थे।इस दौरान जो कुछ उन्होंने देखा और जिससे उनका पारा चढ गया उसमें से सडकारी भोंपू तो पाव भर भी प्रसारित एवं प्रकाशित नहीं कर सका है लेकिन जिले के प्रशासकीय मुखिया की कार्रवाई ने बता दिया कि अगर स्थल पर इनमें से कोई भी सामने आ जाता तो उस पर बिजली गिर ही जाती। श्रद्धालुओं की सेवा में पलक पावडे बिछाने की स्थिति जहां बनाई जा रही है वहां स्वच्छता का इतना अभाव देखा गया कि देखने वाले को मितली आने लग जाए। यही नहीं महाआयोजन के क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर अपने चश्में से देखने वालों को यहां अतिक्रमण भी नहीं दिख रहा था। जिले के प्रशासकीय मुखिया ने ऐसे में चश्में का नंबर भी जांच कर बराबर कर दिया है जवाब भी मांग लिया है। धर्मनगरी के अन्यानेक धर्मस्थलों पर यही हाल देखा जा रहा है। कार्तिम मास शुरू हो चुका है ऐसे में धर्मनगरी के नौ नारायण स्थलों के आसपास जो व्यवस्थाएं होना चाहिए वो भी नहीं है। कार्तिक मास में नौ नारायणों के पूजन का जिक्र पुराणों में मिलता है। खुसूर-फुसूर है कि प्रशासकीय मुखिया की कार्रवाई से शहर की संस्था के दुसरे नंबर वाले साहब के पसीने छूट गए हैं। उनकी आवाज में ही नरमी आ गई है। अभी तो नोटिस देकर जवाब ही मांगा गया है। वैसे ज्ञानी भी कम नहीं है वे नोटिस की वैधानिकता पर ही तर्क वितर्क कर रहे हैं। ज्ञानियों का कहना है कि शहर की संस्था के तीसरे नंबर के साब को तो सही नोटिस गया है लेकिन दुसरे नंबर वाले साब इनके दायरे से बाहर बताए जा रहे हैं उनके लिए संभाग के प्रशासनिक मुखिया को अधिकृत बताया जा रहा है।