उज्जैन। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए जीवितता प्रमाण पत्र देना बनाम फजीहत का काम बनता जा रहा है। बैंकों की और से दस्तावेजों को लेकर कोई सूचना जारी नहीं की गई है। फार्म में जो जानकारी मांगी गई है उसकी पूर्ति एवं सहयोगी दस्तावेज देने के बाद बैंकों में दस्तावेज मांगे जा रहे हैं जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बेवजह चक्कर लगाने पर मजबूर होना पड रहा है। बैंक का सर्वर काम नहीं कर रहा है जिससे भी परेशानी की स्थिति बन रही है।सेवानिवृत्त कर्मचारियों को प्रति वर्ष नंवबर माह में बैंकों में जीवितता प्रमाण पत्र देने के प्रावधान के तहत 01 से 30 नवंबर तक इसका सत्यापन किया जा रहा है। इसके तहत स्टेट बैंक आफ इंदौर की देवासरोड स्थित शाखा में ऐसे कर्मचारियों की खासी भीड उमड रही है। इस बार आनलाईन को प्राथमिकता दी जा रही है इसके तहत बैंक में कर्मचारी आकस्मिक ही आधार कार्ड मांग रहे हैं जबकि फार्म पर मात्र नंबर की जानकारी मागी गई है। इससे कई कर्मचारियों को बेवजह ही चक्कर काटना पड रहा है।केवायसी होने के बावजूद आधार की मांग-बैंक में जीवितता प्रमाण पत्र का सत्यापन करवाने आए कर्मचारियों ने इस फजीहत से दो-चार होने के दौरान बताया कि पहले तो उन्हें फार्म लेने आना पडा। उसके बाद घर से फार्म को भरकर लेकर आए तो संबंधित सत्यापन कर्मी ने आधार मांग लिया जबकि बैंक के फार्म में मात्र आधार के नंबर की जानकारी देने का ही प्रावधान किया गया था। जन्म तिथि प्रमाणन के लिए जरूर फार्म में पुष्टि मांगी गई है जिसे संलग्न किया गया। सेवानिवृत्त कर्मचारियों का कहना था कि बैंकों के आनलाईन खातों में केवायसी किया गया है जिसमें संबंधित सेवानिवृत्त का आधार,पेनकार्ड दर्ज है । ऐसे में आधार की कापी मांगना वरिष्ठजनों को परेशान करने जैसा ही है।इस बार आनलाईन पर जोर-बैंक में जीवितता प्रमाण पत्र को इस बार आनलाईन किया जा रहा है। देवासरोड शाखा में दो काउंटर इसके लिए चलाए जा रहे हैं। दिन में कई बार सर्वर डाउन होने से दो काउंटर पर भी कछुआ गति के काम की स्थिति बनने लगती है। बैंक कर्मी जीवितता प्रमाण का सत्यापन कर मोबाईल के माध्यम से आनलाईन इसे इंद्राज करते हैं जिसमें सर्वर डाउन होने से उसमें समय लग रहा है। यही नहीं कई कर्मचारियों का डाटा बैंक कर्मचारियों को कई बार डालना पड रहा है उसके बाद भी उन्हें सफलता नहीं मिल पा रही है। कई बार तो सेवानिवृत्तों का फोटो भी कई बार खिंचकर उसे आनलाईन डालने की प्रक्रिया करना पड रही है जिसे कर्मचारी सेवानिवृत्तों के सहयोग के साथ अंजाम दे रहे हैं लेकिन सर्वर की गति के कारण परेशानी की स्थिति बार-बार बन रही है। ऐसे मामलों में मेन्यूअल भी सत्यापन भी किया जा रहा है।बैंक से सूचना का अभाव-बैंक में वैसे तो एक नंबवर से ही जीवितता प्रमाण के सत्यापन की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। प्रथम एक दो दिन तो ठीक तीसरे दिन अच्छी संख्या में सेवानिवृत्त पहुंचे थे। ऐसे में उनका कहना था कि वैसे तो अधिकांश सेवानिवृत्तों को जानकारी है कि 1-30 नवंबर तक जीवितता प्रमाण सत्यापन के साथ देना है लेकिन बैंक की और से इसे लेकर सूचना का प्रकाशन किया जाना चाहिए। साथ ही सूचना में फार्म और उसमें लगने वाले दस्तावेजों की जानकारी भी दी जाना चाहिए। इससे सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिक संबंधित दस्तावेज साथ लेकर आएंगे और बैंक में ही फार्म भरकर दस्तावेजों को संलग्न कर दे देंगे जिससे उन्हें बेवजह चक्कर नहीं लगाना पडेगा और समय भी बचेगा। अभी बैंक के फार्म में मात्र जन्म दिनांक की पुष्टि को लेकर दस्तावेज मांगा गया है जबकि काउंटर पर आधार की प्रति मांगी जा रही है। ऐसे में सेवानिवृत्तों को चक्कर लगाने पर मजबूर होना पड रहा है,जबकि बैंक के जिस खाते पर इसे दर्ज किया जा रहा है उसमें पूर्व से ही केवायसी के तहत आधार एवं पेन पंजीयन हैं।पेयजल-बैठने,पार्किंग की परेशानी-सेवानिवृत्त वरिष्ठ बाबूलाल मालवीय ने कहा कि बैंक के अंदर जीवितता प्रमाण पत्र सत्यापन के लिए आने वालों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए बैठने की पर्याप्त व्यवस्था की जाना चाहिए थी,जबकि अंदर ऐसा नहीं है। पेयजल की स्थिति भी सर्वदृष्य नहीं हैं। एक और कोने में है। कई बार सर्वर डाउन के कारण काम में देरी भी लग रही है ऐसे में बुजूर्गों को खडे रहना पड रहा है। बैंक के बाहर पार्किंग की पर्याप्त जगह नहीं होने से वाहनों को खडे करने को लेकर परेशानी हो रही है। कई कर्मचारी जो पैदल चलने में सक्षम नहीं हैं उन्हें आटो टैक्सी से अंदर प्रांगण तक आने में समस्या हो रही है।ई-काउंटर परेशानी भरा-सेवानिवृत्त कर्मचारी राधेश्याम जी ने कहा कि बैंक छोटे-छोटे से काम का हमसे चार्ज वसूल कर रहा है लेकिन उसकी सेवाओं में कमी पर हमें होने वाले नुकसान की पूर्ति नहीं कर रहा है जो कि एक तरफा वाली स्थिति है। बैंक के ई-काउंटर पर अधिकांश समय एटीएम की समस्या रहती है। कभी आउट आफ सर्विस तो कभी पैसा नहीं कभी सर्वर में दिक्कत होती है। पास बुक प्रिटिंग की दो मशीन होने के बावजूद भी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को समस्या से जूझना पडता है। कभी मशीन बार-कोड पकडती है तो कभी नहीं। आए दिन मशीन में पासबुक फस जाती है। हमेशा पास बुक का नया पेज लगाने पर भी पूरा पेज छोडकर नीचे से मशीन प्रिंट देती है। इससे स्टेशनरी का बडा नुकसान हो रहा है। एटीएम से चार बार से ज्यादा पैसा निकालने पर चार्ज लगाया जा रहा है। दुसरे बैंक के एटीएम के उपयोग को चार्जेबल किया गया है। ऐसे में सेवानिवृत्त कर्मचारियों का तो नुकसान ही हो रहा है। इसे लेकर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।