कृष्ण-सुदामा की मैत्री स्थली पर उमड़ा आस्था का सैलाब नारायणाधाम में गूंजा नंद घर आनंद भयो प्रातः 4 बजे अभिषेक-श्रृंगार, शिखर पर ध्वजारोहण, दिनभर खीर प्रसादी का वितरण, रात 12 बजे महाआरती

उज्जैन। कृष्ण-सुदामा की पावन मैत्री स्थली महिदपुर स्थित नारायणाधाम में गुरुवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की धूम रही। श्री कृष्ण सुदामा उत्सव समिति के तत्वावधान में दिनभर भक्ति और उल्लास का माहौल रहा और हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।पुजारी प्रेम नारायण शर्मा ने बताया कि प्रातः 4 बजे भगवान श्रीकृष्ण एवं सुदामा जी का विधि-विधान से अभिषेक, पूजन एवं विशेष फूल बंगला श्रृंगार किया गया। इसके बाद मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण किया गया और पट दर्शनार्थ खोल दिए गए। सुबह से ही मंदिर परिसर में लंबी कतारें लग गईं। समिति द्वारा दिनभर अनवरत खीर प्रसादी का वितरण किया गया।सांदीपनि आश्रम से नारायणाधाम पहुंची रथ यात्रा-प्रतिवर्ष की परंपरा अनुसार महर्षि सांदीपनि जी की भव्य रथ यात्रा इस्कॉन मंदिर से प्रारंभ हुई। शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए शाम 4 बजे यात्रा नारायणाधाम पहुंची। जगह-जगह मंचों से रथ का स्वागत किया गया और फलाहारी वितरित की गई।कथा का समापन-इस अवसर पर अयोध्या निवासी साध्वी मीरा दीदी की चल रही श्री राम विवाह कथा का भी समापन हुआ। वहीं मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति मंत्रालय द्वारा श्रीकृष्ण पर्व के तहत रोजाना शाम 7 से 10 बजे तक सांस्कृतिक आयोजन हो रहे हैं, जिसमें रासलीला के माध्यम से कृष्ण लीलाओं का मंचन किया जा रहा है। इसलिए कहा जाता है मैत्रीस्थल-समिति के पवन गोयल ने बताया कि मान्यता है कि श्रीकृष्ण और सुदामा सांदीपनि आश्रम में अध्ययन के दौरान जंगल में लकड़ी लेने गए थे, तब वर्षा होने पर उन्होंने नारायणाधाम में रात्रि विश्राम किया था। तभी से इसे मैत्री स्थल कहा जाता है।दिलीप सिंह चौहान ने बताया कि रात्रि 12 बजे जन्म के बाद महाआरती हुई और महाप्रसाद बांटा गया।

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