खुसूर-फुसूर घर से शुरूआत… मैं अकेला ही चला था जानिबे मंजिल लोग जुडते गए कारवां बनता गया… कुछ इसी तर्ज पर जिले के ग्रामीण क्षेत्र के एक शिक्षाविद ने सिर्फ नाम ही नहीं कमाया उसके लिए उन्होंने समाज को क्रांति का पथ अपने घर से दिया है। समाज की प्रमुखता स्वीकार करके मात्र दिखावा ही नहीं किया उसके लिए समाज में उदाहरण भी पेश किया है। आमतौर पर क्रांतिकारी विचारधारा से प्रेरित इस शख्स ने अपने कर्मों से अपने धर्म को साबित किया। कभी वे पर्यावरण को लेकर संकल्प करते…
Read More