उज्जैन। बोमा से कृषणमृग एवं नीलगाय पकडने के अभियान के द्वितीय चरण में उज्जैन में शनिवार को पहले दिन ब्रजराज खेडी में बोमा लगा दिया गया है। पहले दिन नो फ्लाईट डे होने के कारण हेलीकाप्टर नहीं उडाया जा सका । इसके चलते एक्शन नहीं हो सका है। रविवार को सुबह से ही नीलगाय के साथ दक्षिण अफ्रीका की टीम के साथ वन विभाग चुनौती को स्वीकार करेगा।फसलों को क्षेत्र में नुकसान पहुंचाने वाली नीलगाय को लेकर कृषक बुरी तरह से परेशान हैं। आए दिन इनके कारण हाईवे पर दुर्घटना की स्थिति भी बन रही है। ऐसे में दक्षिण अफ्रीका की बोमा पद्धति से नीलगायों को पकडने का अभियान 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक जिला मुख्यालय की तहसील पर चलाया जाना है। इसके तहत वैसे तो शनिवार से ही कार्रवाई होना थी लेकिन यह नो फ्लाईट डे के कारण संभव नहीं हो सकी है अब रविवार सुबह से अभियान गति पकडेगा और यहां से नीलगायों को पकड कर गांधीसागर वन्य जीव अभ्यारण्य मंदसौर भेजा जाएगा।
पायलट ने डीजीसीए के नार्मस का पालन किया-मुख्य वन संरक्षक डा. किरण बिसेन के अनुसार शनिवार को हेलीकाप्टर उडाने वाले पायलट के लिए नो फ्लाइट डे था। डीजीसीए के नार्मस के तहत निर्धारित समय की उडानों के उपरांत पायलट को रेस्ट लेना होता है। ऐसे में एविएशन के नियमों का पालन करते हुए पायलट रेस्ट पर रहा है। रविवार को एक बार फिर से पायलट पूरी तरह से दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों को हेलीकाप्टर में लेकर उडान भरेगा और नीलगायों की घेराबंदी की जाएगी।
पहला बोमा ब्रजराजखेडी में लगा-डा.बिसेन के अनुसार उज्जैन जिला मुख्यालय की तहसील में पहला बोमा ब्रजराजखेडी में लगाया गया है। पूर्व निर्धारित उत्तर पूर्व के अक्षांश एवं देशांश की लोकेशन में बोमा को निर्धारित किया गया है। बोमा स्थल के आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में एक्शन के दौरान विद्युत प्रदाय बाधित किया जाएगा। बोमा क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम एंबूलेंस के साथ मौजूद रहेगी। पशु चिकित्सा विभाग पशुओं को पकडे जाने के बाद जांच के लिए तैनात किया गया है। लोक निर्माण विभाग ने हेलीकाप्टर के लिए अस्थाई हेलीपेड का चयन किया है। ग्रामीणों के साथ समन्वय जनपद पंचायत ने किया है।
कृष्णमृग सेअधिक पेचिदा नीलगाय पकडना-डा.बिसेन के अनुसार शाजापुर जिला अंतर्गत अभियान के प्रथम चरण में डेढ हजार से अधिक कृष्णमृगों को रेस्क्यू कर कूना,रानी दुर्गावती एवं गांधीसागर अभ्यारण्य में छोडा गया है। अभियान के दौरान मात्र 94 नीलगाय ही पकडी जा सकी है। ऐसे में उज्जैन में अभियान के दुसरे चरण में मात्र नीलगायों को पकडा जाना है। उन्होंने स्वीकार किया कि कृष्णमृग से अधिक पेचिदा नीलगाय का रेस्क्यू है।