उप-पंजीयक कार्यालय में नियमों का खुला उल्लंघन: सब-रजिस्ट्रार का काम संभाल रहे प्राइवेट लडके

 सारंगपुर।सारंगपुर उप-पंजीयक कार्यालय से शासकीय कार्यप्रणाली और गोपनीयता पर गंभीर सवाल खडे करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ सरकारी जिम्मेदारियों का निर्वहन अधिकृत कर्मचारियों या अधिकारियों द्वारा किए जाने के बजाय गैर-सरकारी और अप्रमाणित निजी युवकों (प्राइवेट लडकों) से कराया जा रहा है। ये निजी युवक न केवल कार्यालय के गोपनीय दस्तावेजों की जांच-पडताल कर रहे हैं, बल्कि क्रेता-विक्रेता की पहचान से जुडे संवेदनशील बायोमेट्रिक डेटा को भी हैंडल कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर नियमों का खुला उल्लंघन है।
गोपनीय दस्तावेजों की जांच कर रहे निजी युवक-उप-पंजीयक कार्यालय जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री से जुडे सबसे संवेदनशील शासकीय दफ्तरों में गिना जाता है। नियमानुसार रजिस्ट्री के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन, क्रेता-विक्रेता की मूल पहचान की जांच, फोटो खींचना और बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी करना केवल सब-रजिस्ट्रार या अधिकृत शासकीय कर्मचारियों का वैधानिक दायित्व है। लेकिन सारंगपुर कार्यालय की तस्वीर इसके बिल्कुल उलट है। यहाँ दो प्राइवेट लडके सब-रजिस्ट्रार का मुख्य काम संभालते नजर आ रहे हैं। ये युवक कंप्यूटर पर जमीन-जायदाद से जुडे गोपनीय और महत्वपूर्ण कागजात खोलकर जांचते हैं। इतना ही नहीं, रजिस्ट्री कराने आए आम नागरिकों के फोटो खींचने और उनकी आंखों का आइरिस बायोमेट्रिक मशीन से लेने जैसा अति-संवेदनशील काम भी इन्हीं निजी हाथों में सौंप दिया गया है।
सब-रजिस्ट्रार पर साठगांठ का आरोप-प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन दोनों प्राइवेट युवकों को किसी सरकारी प्रक्रिया के तहत नहीं रखा गया है, बल्कि उप-पंजीयक पंकज दीक्षित ने स्वयं इन्हें व्यक्तिगत तौर पर काम पर बैठा रखा है। सरकारी कार्यालय में इस तरह की अव्यवस्था से यह अंदेशा बढ गया है कि आम जनता के व्यक्तिगत डेटा और जमीन से जुडे संवेदनशील रिकॉर्ड्स का गलत इस्तेमाल या रिसाव हो सकता है।
पारदर्शिता की कमी, व्यवस्था पर लोगों का गुस्सा-दफ्तर में काम कराने आ रहे नागरिकों ने कार्यालय की लचर और संदेहास्पद कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। नियमों के मुताबिक, प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कंप्यूटर मॉनिटर की एक स्क्रीन बाहर की ओर होनी चाहिए ताकि क्रेता और विक्रेता अपने सामने अपनी रजिस्ट्री के विवरण को देख सकें। हालाँकि, सारंगपुर कार्यालय में दोनों कंप्यूटर स्क्रीन अंदर ही लगा रखी गई हैं, जिससे बाहर बैठे व्यक्ति  को यह पता ही नहीं चलता कि कंप्यूटर में क्या प्रविष्टि की जा रही है। स्थानीय लोगों और पक्षकारों ने कार्यालय में पारदर्शिता के अभाव और मनमानी की शिकायत उच्च अधिकारियों से की है। क्योंकि किसी भी शासकीय दफ्तर में अनधिकृत या निजी व्यक्तियों से सरकारी कामकाज कराया जाना पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है। यदि सारंगपुर उप-पंजीयक कार्यालय में प्राइवेट लडकों से गोपनीय दस्तावेजों और बायोमेट्रिक प्रविष्टियों का काम कराया जा रहा है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों पर सख्त नियमानुसार कार्रवाई होना चाहिए। मामले में जब उप पंजीयक पंकज दीक्षित से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि इस विषय को लेकर बाद में चर्चा करते है। जबकि जिला पंजीयक मोहम्मद युसूफ से उनके दूरभाष नंबर 97534-20571 पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, मगर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
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