इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण में पूर्व में कार्यरत सिक्योरिटी एजेंसी पर गार्ड श्रमिकों का वेतन और भविष्य निधि (पीएफ) की राशि जमा नहीं करने सहित श्रमिकों के शोषण के आरोप लगाए गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता रूपेश कटारिया ने इस संबंध में मुख्यमंत्री, संभागायुक्त एवं इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष सहित संबंधित अधिकारियों को शिकायत प्रस्तुत कर जांच और कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आईडीए में 1 अगस्त से पूर्व संचालित एस.एस. सिक्योरिटी एजेंसी द्वारा कार्यरत कुछ सुरक्षा गार्डों का पिछले तीन से चार माह का वेतन बकाया है। साथ ही श्रमिकों की भविष्य निधि राशि भी नियमानुसार जमा नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है। रूपेश कटारिया ने मांग की है कि एजेंसी के किसी भी लंबित आर्थिक दायित्व अथवा जमा राशि का भुगतान करने से पहले सभी संबंधित गार्ड श्रमिकों से व्यक्तिगत रूप से चर्चा कर उनके वेतन और पीएफ भुगतान की जांच एवं पुष्टि की जाए। शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रत्येक श्रमिक के बकाया भुगतान की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही एजेंसी को आर्थिक दायित्वों से मुक्त किया जाए। शिकायत में एजेंसी पर आर्थिक अनियमितताओं और श्रमिकों के साथ कथित शोषण के भी आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच कर दोषी पाए जाने पर संस्था के स्थानीय प्रबंधक एवं जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ वैधानिक और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गई है। कटारिया ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस से पहले संबंधित गार्डों का बकाया वेतन और पीएफ राशि दिलाने के लिए भी अधिकारियों से अनुरोध किया गया था, लेकिन उनके अनुसार अभी तक संबंधित श्रमिकों को पूरा भुगतान और पीएफ का लाभ नहीं मिल सका है। उन्होंने मांग की है कि मामले की जांच के लिए पीएफ विभाग और श्रम विभाग को भी जानकारी भेजी जाए तथा श्रम कानूनों और पीएफ नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
शिकायतकर्ता ने गंभीर अनियमितताएं प्रमाणित होने की स्थिति में एजेंसी को भविष्य के कार्यों से प्रतिबंधित या ब्लैकलिस्ट करने पर भी विचार करने की मांग की है। शिकायत की प्रतिलिपि पुलिस कमिश्नर इंदौर, पीएफ विभाग, श्रम आयुक्त मध्य प्रदेश, कलेक्टर इंदौर तथा इंदौर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालिक अधिकारी को भी भेजी गई है।