उज्जैन। लोक शिक्षण संचालनालय के शैक्षणिक कैलेंडर शिक्षा सत्र 2026-27 में 25 जुलाई को प्रथम तीन काल खंडों में साप्ताहिक बाल सभा का आयोजन-सबल भारत के अंतर्गत नृत्य/संगीत के कार्यक्रम होना थे। इसके उलट बच्चों को इन काल खंडों में पढाई करवाई गई। इसके साथ ही इसी दिन जिला स्तरीय इंटर स्कूल बैंड प्रतियोगिता होना थी। हालत यह रही की प्रतियोगिता तो ठीक स्कूलों में भी बैंड नहीं बजा। विद्यार्थियों को बैंड देखने को भी नहीं मिला।
प्रति वर्ष लोक शिक्षण संचालनालय शैक्षणिक गतिविधियों का कैलेंडर जारी करता है। इस वर्ष भी इसका प्रकाशन किया गया और जिला स्तर पर इसके मुताबिक शैक्षणिक एवं अन्य गतिविधियों के संचालन के निर्देश भी दिए गए। शैक्षणिक सत्र की शुरूआत के साथ ही अप्रेल में इसे लागू कर दिया गया। जिले में शैक्षणिक कैलेंडर की बजाय स्थानीय स्तर पर स्कूलों के मान से ही काम चल रहा है।
मात्र प्रमुख कार्यक्रम का आयोजन-
इधर सामने आ रहा है कि जिले में शैक्षणिक कैलेंडर के मान से मात्र प्रमुख कार्यक्रम ही आयोजित किए जा रहे हैं। अप्रेल में प्रवेशोत्सव का आयोजन पूरे जोर शोर से किया गया । इसके बाद शैक्षणिक गतिविधियों का तकरीबन पालन करने की बात सामने आ रही है लेकिन 20 मिनट की प्रार्थना सभा में अधिकांश स्कूलों में अक्सर मात्र कार्यपूर्ति की जा रही है। सामने आ रहा है कि 20 मिनट की प्रार्थना सभा में आज का कैलेंडर पंचांग 1 मिनट ,राष्ट्रगान 52 सेकंड, सरस्वती वंदना 2 मिनट, प्रतिज्ञा 1 मिनट ,सुभाषित /अमृतवचन 1 मिनट, समाचार वाचन क्षेत्रीय प्रादेशिक,राष्ट्रीय व खेल आदि 2 मिनट,जन्मदिन अभिनंदन 1 मिनट, सूचनाए प्राचार्य द्वारा 2 मिनट,पी.टी. / एरोबिक्स 5 मिनट , म. प्र. गान 3 मिनट ,राष्ट्रगीत 1 मिनट के साथ देशगान, एवं किसी विशेष दिवस अथवा महापुरूष की जयंती पर संस्था प्राचार्य / वरिष्ट शिक्षक द्वारा उनके जीवन पर उद्बोधन का भी प्रावधान है। अधिकांश स्कूलों में विद्यार्थी इन सब से अनभिज्ञ ही हैं।
विद्यार्थी कैलेंडर से अंजान-
इधर 25 जुलाई को बालसभा को लेकर आधा दर्जन स्कूलों के बच्चों से जानकारी लेने पर उनका यही कहना था कि हमें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। उत्कृष्ठ एवं पीएम श्री स्कूलों के विद्यार्थियों से जिला स्तरीय इंटर स्कूल बैंड प्रतियोगिता के संबंध में जानने पर सामने आया कि न तो स्कूल स्तर पर इसकी कोई जानकारी ही साझा की गई है न हीं जिला स्तर पर ही ऐसे किसी आयोजन को लेकर सूचना ही है। विद्यार्थियों का कहना था कि बैंड में स्कूल में कौन-कौन से यंत्र हैं ये भी उनके देखने में अब तक नहीं आया है। इधर विभागीय स्तर पर भी जानकारी लेने पर यही स्थिति सामने आती रही। विद्यार्थी तो यहां तक बोले की हमें तो शैक्षणिक कैलेंडर की जानकारी ही नहीं है न ही हमें इसे लेकर कभी बताया जाता है। स्कूल में भी कैलेंडर कहां लगाया गया है देखने में ही नहीं आता है।
-शैक्षणिक कैलेंडर के मान से बाल सभा का आयोजन संस्था स्तर पर होना चाहिए था। संस्थ प्रमुख को इसे देखना है। जिले में उत्कृष्ठ एवं पीएम श्री विद्यालयों में बैंड की सुविधा है। शैक्षणिक कैलेंडर में अगर प्रतियोगिता के लिए निर्धारण था तो किया जाना चाहिए । कैलेंडर के मान से गतिविधि संचालन के इस मामले को दिखवाया जाएगा। संभव है कि 15-29 जुलाई गुरू पुर्णिमा पखवाडे की व्यस्तता के कारण इन्हें बाद में आयोजित किया जाए।
-महेन्द्र खत्री, जिला शिक्षा अधिकारी,उज्जैन