उज्जैन। धर्मनगरी उज्जैन को पर्यटन एवं स्वास्थ्य शिक्षा का विश्व विद्यालय देकर एक बार फिर से मालामाल करने की तैयारी की जा रही है। इससे स्वास्थ्य शिक्षा से संबंधित कार्यों को लेकर आने वाले पर्यटन एवं तीर्थाटन का लाभ भी ले सकेंगे और उज्जैन को बहुत कुछ हासिल हो सकेगा। यही नहीं मेडिसीटी के साथ मेडिकल डिवाइस पार्क सहित अन्य सभी योजनाओं को भी इससे आधार मिल सकेगा।हाल ही में मध्यप्रदेश विधानसभा ने चिकित्सा शिक्षा का सबसे बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में उज्जैन में नए धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय की स्थापना का है। इसके साथ ही जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय का क्षेत्राधिकार घटाकर केवल चार संभागों तक सीमित कर दिया गया है। मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक तथा मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक बहुमत से पारित किए गए। नई व्यवस्था के अनुसार अब जबलपुर आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के अधीन जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग के सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेज रहेंगे। उज्जैन स्थित धन्वंतरी स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के अधीन भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, नर्मदापुरम और चंबल संभाग के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेज संचालित होंगे। सरकार का तर्क है कि इससे दोनों विश्वविद्यालयों पर प्रशासनिक दबाव कम होगा और मेडिकल संस्थानों के संचालन में अधिक दक्षता आएगी।ये होगा लाभ-चिकित्सा विवि की स्थापना से उससे संबंधित महाविद्यालयों के छात्रों एवं प्राध्यापकों के साथ सभी का संबंध रहेगा। 6 संभाग के अधीन आने वाले महाविद्यालयों से आने वालों के कारण धर्मनगरी का पर्यटन और तीर्थाटन और अधिक विकसित होगा और यहां के व्यवसायों को अधिक आधार मिलेगा। इसके साथ ही मेडिकल डिवाइस पार्क भी इससे और मजबूती हासिल कर सकेगा। वहां बनने वाले उपकरण एवं महाविद्यालयों में होने वाली रिसर्च के आधार पर नए उपकरणों की ईजाद के लिए भी यह आधार का काम करेगा। हाल की स्थिति में उज्जैन संभाग के अधिन जिलों में मंदसौर,रतलाम,देवास,उज्जैन में ही एक दर्जन मेडिकल कालेज हैं। जिन्हें अपने कार्यो के लिए प्रदेश के दुसरे छोर पर जाना पडता था। इससे सीधे तौर पर लाभ महाविद्यालयों एवं उसकी प्रशासनिक कार्रवाईयों में तेजी आने के साथ लाभ होगा। सरकार का दावा—स्वास्थ्य शिक्षा का विस्तार
मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 33 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं और सरकार आने वाले वर्षों में एमबीबीएस की 10 हजार तथा पीजी की 5 हजार सीटों का लक्ष्य लेकर चल रही है। एक विश्वविद्यालय पर लगातार बढ़ते संस्थानों का बोझ प्रभावी संचालन में बाधा बन रहा था। दो विश्वविद्यालय बनने से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी, संबद्ध कॉलेजों की निगरानी बेहतर होगी, चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी। संशोधन विधेयक के तहत मेडिकल विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज में 10 वर्ष तक प्रोफेसर रहने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। अब स्वास्थ्य क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञों को भी कुलपति बनाया जा सकेगा।
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