ईथाईल वाली दवा डाक्टर के पर्चे के बगैर मिलना संभव नहीं   अब अवैध भट्टी की शराब बनाने वालों को टींचर मिलना मुश्किल होगा -बगैर पर्चे के ईथाईल अल्कोहल की दवा देने पर मुसीबतों का सामना करना होगा विक्रेता को

 

उज्जैन। इथाईल अल्कोहल की 12 प्रतिशत से अधिक मात्रा वाली दवाएं अब बगैर डाक्टर के पर्चे के विक्रय नहीं की जा सकेंगी। केंद्र सरकार ने ऐसे उत्पादों की बिक्री के लिए लाइसेंस और डॉक्टर के पर्चे को अनिवार्य कर दिया है। इथाईल अल्कोहल के एक रूप में टींचर भी है जिसका उपयोग अवैध हाथ भट्टी की शराब बनाने में किया जाता है। ऐसे में इस अवैध काम पर भी बडी मात्रा में रोक लगेगी।

जिला ड्रग निरीक्षक धर्मेन्द्र सिंह कुशवाह के अनुसार केंद्र सरकार ने शुक्रवार को अधिक मात्रा में एथिल अल्कोहल (इथेनॉल) युक्त औषधीय फॉर्मूलेशनों (दवाओं) के नियमन को सख्त कर दिया।  इसे लेकर नोटिफिकेशन को सभी विके्रताओं के संज्ञान में ला दिया गया है। इसके लिए सोमवार को विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई करते हुए पत्र विक्रेताओं की एसोसिएशन एवं सोश्यल मिडिया पर प्रसारित कर दिया जाएगा।

ये किया सरकार ने –

सरकार ने ऐसे उत्पादों की बिक्री के लिए लाइसेंस और डॉक्टर के पर्चे को अनिवार्य कर दिया है। इस कदम का उद्देश्य इन दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाना और साथ ही वास्तविक चिकित्सीय जरूरतों के लिए उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करना है। मंत्रालय ने बताया कि इलायची, अदरक और अन्य सुगंधित औषधीय फॉर्मूलेशन की टिंचर जैसी कई औषधीय तैयारियों को पहले अनुसूची-के तहत लाइसेंस संबंधी आवश्यकताओं से छूट प्राप्त थी। हालांकि, इनमें से कुछ उत्पादों में 80 से 90 प्रतिशत तक एथाइल अल्कोहल होता है, जिससे इनके नशे के उद्देश्य से दुरुपयोग की आशंका रहती है। केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि कुछ राज्य सरकारों ने ऐसे उत्पादों के दुरुपयोग को लेकर चिंता जताते हुए इस संबंध में सुझाव और संदर्भ भेजे थे।
लाइसेंस प्राप्त करना होगा-

इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने तय किया है कि 12 प्रतिशत से अधिक एथाइल अल्कोहल वाली और 30 मिलीलीटर से अधिक पैकिंग में उपलब्ध सभी औषधीय तैयारियां अब अनुसूची-के तहत मिलने वाली छूट की पात्र नहीं होंगी। इसके परिणामस्वरूप ऐसे उत्पादों के निर्माता और विक्रेताओं को अब औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत आवश्यक लाइसेंस प्राप्त करना होगा।
विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा
संशोधन के तहत इन औषधीय तैयारियों को ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची-एच1 में भी शामिल किया गया है, जिससे ये अधिक कड़े नियामकीय नियंत्रण के दायरे में आ जाएंगी। अनुसूची-एच1 में शामिल दवाएं केवल पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिशनर के पर्चे पर ही बेची जा सकेंगी और इनके विक्रय का विस्तृत रिकॉर्ड रखना भी अनिवार्य होगा।
निगरानी -नियंत्रण होगा मजबूत-

मंत्रालय के अनुसार, संशोधित व्यवस्था से अल्कोहल युक्त औषधीय उत्पादों की निगरानी और नियंत्रण मजबूत होगा तथा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इनकी आपूर्ति केवल विनियमित दवा वितरण प्रणाली के माध्यम से ही हो। इससे इन उत्पादों के दुरुपयोग और गलत इस्तेमाल की आशंका में उल्लेखनीय कमी आएगी जबकि वास्तविक चिकित्सीय जरूरत वाले मरीजों के लिए इनकी उपलब्धता बनी रहेगी। मंत्रालय ने कहा कि यह संशोधन देश की दवा नियामक व्यवस्था को और मजबूत बनाने, औषधीय उत्पादों के विवेकपूर्ण एवं जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने तथा जनस्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के सरकार के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।

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