खुसूर-फुसूर मात्र दस्तावेजों तक न सिमटें…

खुसूर-फुसूर

मात्र दस्तावेजों तक न सिमटें…

एक बार फिर से शिक्षा दान स्थलों पर घंटियां बजना शुरू हो गई है। इसके साथ ही नन्हे मुन्नों का शिक्षास्थल के निजी परिवहन वाहनों से आवागमन का सिलसिला ग्रामीण से लेकर शहर की संस्था तक में शुरू हो चुका है। परिवहन के वाहनों के संचालन के लिए अन्यानेक नियम एवं कानून हैं उसके साथ ही समय –समय पर प्रदेश स्तर पर भी सरक्यूलर एवं नियम लागू किए गए हैं। हाल ही में कुछ दिनों पूर्व जिला मुख्यालय के उत्तर छोर की तहसील अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र में एक वाहन खाई में गिरा था। भली रही भगवान की किसी भी बच्चे को कोई चोंट नहीं आई। व्यवस्थागत एवं संचालन की स्थिति में अन्यानेक कमियां अक्सर सामने आती हैं। प्रबंधन की इस कमी के कारण ही कई बार दुर्घटनाएं होती है। कुछ वर्षों पूर्व जिले के उत्तर-पूर्व ईशान कोण के टप्पे के पास दुर्धटना में कई बच्चे हताहत हुए थे बाद में संबंधित वाहन के दस्तावेज ही नहीं मिले थे। ऐसे में मात्र अब दस्तावेजों तक सिमित नहीं रहा जाए। संचालक और यहां तक की वाहन के चालकों एवं उनमें रखे जाने वाले कर्मचारियों तक भी जांच का दायरा बढाया जाना चाहिए। प्रशासनिक स्थिति में एक दल तहसील स्तरों पर बनाया जाना चाहिए। इसमें प्रशासन,वर्दी,परिवहन,शिक्षा एवं बच्चों से संबंधित विभाग के कर्मचारियों को शामिल किया जाना चाहिए। सिर्फ वाहन की जांच करने से ही कुछ नहीं होने वाला है। शिक्षा स्थलों की और से उसके टायरों के बदलाव तक में बचत की जाती है। वाहन के कई पार्टस बदलने की बजाय घिसे जाते हैं। यहां तक की कमानी के पत्ते टूटने पर भी वाहन का संचालन जारी रखा जाता है जिससे वाहन का संतुलन बिगडता है। ऐसे में गंजे टायर भी कई बार दुर्घटना के लिए जिम्मेदार बन जाते हैं। वाहनों की तकनीकी जांचें भी आवश्यक हो गई हैं। चालक का धैर्य भी टेस्ट लेकर देखा जाना चाहिए। उसकी आई टेस्ट होना चाहिए। उसके चरित्र का सत्यापन होना चाहिए। वाहन में आने जाने वाले बच्चों से बराबर संबंधित विभाग के महिला कर्मचारी संवाद करेंगे तो बच्चे उन्हें कई सारी बातों से अवगत करवाएंगे। इससे भविष्य के घटनाक्रमों को भी टाला जा सकेगा। खुसूर-फुसूर है कि अभी तो मात्र वाहन के दस्तावेज कागजी आधार पर जांच कर इतिश्री की जा रही है बच्चों के प्रति जिम्मेदार की भूमिका निभाने के लिए मूल रूप से संयुक्त दलों के माध्यम से ही इस काम को अंजाम दिया जाना चाहिए जिससे बच्चों के लिए पूर्ण जिम्मेदार की भूमिका सामने आ सकेगी। अभी तो मात्र पूरा मामला दस्तावेजों तक सिमटा हुआ है। इसे जिम्मेदार स्थिति तक ले जाना होगा।

 

 

 

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