इस बार भी खरीदी में सोख्ता की स्थिति: समर्थन मुल्य पर खरीदी का 1.39 करोड का गेहुं गायब

उज्जैन। कुछ माह पूर्व सरकार ने किसानों से समर्थन मुल्य पर गेहुं खरीदी की थी। जिले भर में इसकी जोरदार रेकार्ड खरीदी की गई थी। इसी गेहुं में से 1.39 करोड से अधिक की राशि का 396 टन गेहुं गायब हो गया है। गेहुं गायब होने का यह मामला खरीदी करने वाली सोसायटी और गोदाम तक पहुंचाने वाले परिवहनकर्ता के बीच ही होना सामने आया है।हर साल की तरह एक बार फिर से इस वर्ष भी समर्थन मुल्य पर खरीदी का गेहुं गायब हुआ है। इसे शासकीय भाषा में सोख्ता कहा जाता है। इस वर्ष उज्जैन जिले में 172 केंद्रों के माध्यम से सरकार ने समर्थन मुल्य पर गेहुं की खरीदी की थी। उज्जैन में पिछले वर्ष 95 हजार मेट्रिक टन की अपेक्षा इस बार 1.24 लाख मेट्रिक टन की खरीदी की थी। इसी में से 396 टन गेहुं का हिसाब किताब मिलान में नहीं आ रहा है। प्रारंभिक स्थिति में दस्तावेजों से आंकडों को देखा गया है। सोसायटियों की खरीद एवं वहां से तौलकर परिवहनकर्ता के दस्तावेजों में दर्ज आंकडों को जांचा गया है।सरकार को कोई नुकसान नहीं-जिला आपूर्ति अधिकारी शालू वर्मा से जानकारी लेने पर उन्होंने गेहुं की मात्रा का खुलासा नहीं किया लेकिन दावे से यह कहा कि इस पूरे मामले से शासन को कोई वित्तीय नुकसान की स्थिति नहीं है। प्रति वर्ष यह सोख्ता स्थिति बनती है जिसे शार्टेज कहा जाता है।  हमें खरीदी के आंकडों का वजन चाहिए होता है। शार्टेज माल की किमत सोसायटी एवं परिवहनकर्ता से वसूली जाती है। इस बार भी वसूल की जाएगी। खरीदी में सोसायटी का जो कमीशन होता है और परिवहनकर्ता का जो भूगतान होता है उसमें से इसकी वसूली कर ली जाती है।

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