नीमच : नवविवाहिता सुकन्या को उसके पति व सास-ससुर ने दहेज की मांग को लेकर शादी के ठीक 8 माह के भीतर पेट्रोल डालकर आग लगाकर उसकी हत्या कर दी। यह मामला न्यायालय में चला और तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास और 20000 रूपए के अर्थदंड से दण्डित किया गया। यह निर्णय असली अदालत में नहीं बल्कि ज्ञानमंदिर विधि महाविद्यालय में आयोजित मूट कोर्ट में दिया गया। महाविद्यालय के छठे सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने एक काल्पनिक कहानी के आधार पर अपने-अपने पक्ष में अंतिम तर्क प्रस्तुत किये।
विधि के विद्यार्थियों को न्यायालयीन प्रक्रिया से अवगत कराने के लिए यह आयोजन किया गया। जिसमें भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा-85, 80, 103, 3(5) एवं दहेज प्रतिषेध अधि. 1961 की धारा-3 व 4 के अंतर्गत काल्पनिक कहानी के आधार पर विद्यार्थियों ने न्यायिक प्रक्रिया को समझा। म.प्र. शासन द्वारा आरक्षी केन्द्र नीमच केंट, नीमच विरुद्ध ज्ञानवती व अन्य के प्रकरण पर अंतिम बहस तीन बिन्दु (प्रकरण पक्षकार, प्रकरण के तथ्य व अंतिम तर्क) पर आधारित थी। मूट कोर्ट में विद्यार्थियों ने बहुत ही उत्साह के साथ भाग लिया।मूटकोर्ट में विद्यार्थियों के दो ग्रुप बनाये गये थे जिसमें ग्रुप – ए ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की और ग्रुप-बी के विद्यार्थियों ने बचाव पक्ष की ओर से पैरवी की। दोनों पक्षों को सुनने के पश्चात यह निर्णय दिया गया कि आरोपीगण ने मृतिका सुकन्या की हत्या कारित की है। क्योंकि यह हत्या आरोपीगण द्वारा विवाह से 7 वर्ष के भीतर और दाह द्वारा सामान्य परिस्थितियों से अन्यथा कारित की गई। अतः आरोपीगण को भा.न्या.सं. 2023 और दहेज प्रतिषेध अधि. 1961 की उक्त धाराओं में दंडित किया जाना न्यायोचित है।मूटकोर्ट का प्रशिक्षण प्राचार्य डॉ.विवेक नागर, मूटकोर्ट प्रभारी डॉ. नवीन चौहान, डॉ. वर्षा काछवाल एवं अधिवक्ता राजकुमार जहाँगीर शाह के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को दिया गया