खुसूर-फुसूर जल जीव संकट में जिम्मेदार नजरअंदाजी में…

खुसूर-फुसूर

जल जीव संकट में जिम्मेदार नजरअंदाजी में…

महाआयोजन के लिए तैयारी जमकर की जा रही है। इसके चलते निर्माणों की बाढ बह निकली है। शहर से लेकर पास के शहर तक निर्माण ही निर्माण चल रहे हैं। सडक चौडीकरण , गंदगी का डायवर्शन,उत्तर वाहिनी के घाट निर्माण एवं चौडीकरण किया जा रहा है। इन निर्माणों में नियमों का मात्र ठेके में हवाला दिया गया है। धरातल पर नियमों को कोई नहीं देख रहा है। जिम्मेदारों को निर्माणों की पूर्णता की चिंता सताने लगी है। निर्माण के लिए जिम्मेदार ठेकेदार भी धडाधड काम निपटाने में लगे हैं। उत्तर वाहिनी के तटों को बंध लगाने वाले निर्माण में ठेकेदार के नियमों की अनदेखी जल जीवों के जीवन का संकट बन रहा है। काम के दौरान फैल रही गंदगी और प्रदुषण को लेकर जिम्मेदार विभाग पूरी तरह से नजरअंदाजी किए हुए है। तमाम अधिकारी स्थलों पर पहुंचकर अपनी जिम्मेदारी के तहत काम को करवाने में लगे हैं लेकिन अब तक इस विभाग के जिम्मेदारों को उनकी जिम्मेदारी ही समझ नहीं आ रही है। न तो ये ऐसे निर्माण स्थलों पर पहुंची ही रहे हैं और न ही ऐसे स्थलों पर जाकर संबंधित निर्माण करने वालों को गंदगी और प्रदुषण न फैले इसके लिए चेता ही रहे हैं। इससे काम करने वाले अगर अंजाने में कोई गलती कर रहे हैं तो उसे भी रोकने की स्थिति नहीं बन पा रही है और गंदगी प्रदुषण की स्थिति बराबर बढ रही है। बराबर इसका प्रभाव जलीय जीवों के जीवन पर संकट के रूप में रहना तय है। खुसूर-फुसूर है कि बोर्ड नाम का यह विभाग में बोर्ड पर और कागजों के दरमियान ही चल रहा है। इसके धरातल पर काम की स्थिति सफेद हाथी सी ही है। दिग्गज अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान भी इस विभाग के जिम्मेदारों की अनुपस्थिति रहती है। ऐसा भी संभव नहीं है कि निर्माण हों और प्रदुषण को कम करने और रोकने की दिशा में बोर्ड की पहल और समझाईश की जरूरत न हो । इसके बाद भी इस बोर्ड का होना और न होना बराबर सामने ही है। महाआयोजन निर्माण को पूर्ण कराने में व्यस्त अधिकारी भी इस बोर्ड को बोर्ड ही मान रहे हैं।

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