खुसूर-फुसूर भवन क्या टूटा अस्पताल का नाम ही बदल गया

खुसूर-फुसूर

भवन क्या टूटा अस्पताल का नाम ही बदल गया

मेरे घर की दिवार क्या टूटी लोगों ने आने जाने का रास्ता ही बना लिया जैसे शायरी के शब्द यहां मूल की सियासत में आकार ले रहे हैं। इसे सियासत कहा जाए या फिर साफ्टवेयर की तब्दीली की जिला अस्पताल का नाम ही गायब हो गया है। संभाग स्तर के चिकित्सालय का भवन तोडकर यहां मेडिसिटी बनाई जा रही है। चिकित्सालय को पास में महाआयोजन 2016 के समय बने माता एवं बच्चों वाले अस्पताल में स्थांतरित किया गया है। पिछले साल में यह परिवर्तन किया गया था। पुराने भवन को तोडकर उसके स्थान पर नया भवन बनाया जा रहा है। इस सब हेरफेर में हाल ही में एक और बडा हेरफेर कागजों में कर दिया गया । संभाग के सबसे बडे अस्पताल का नाम ही कागजों में बदल दिया गया है। उसका नामकरण काफी वर्षों पूर्व ही हो चुका था। स्वर्गीय श्रीमंत माधवराव सिंधिया जिला अस्पताल के नाम से इसे जाना जाता था। हाल ही में पर्चे पर यह नाम सिरे से ही गायब कर दिया गया है। यह पिछले कुछ दिनों में ही हुआ है इससे पूर्व तक बराबर नाम पर्चे पर आता रहा है। ओपीडी एवं आईपीडी पर्चे से सिरे से नाम गायब होना सियासतदारी के हिसाब से भी देखा जा रहा है। खुसूर-फुसूर है कि साफ्टवेयर में तब्दीली किए जाने से ऐसा होना सामने आ रहा है लेकिन सियासतदारों में  एक समग्र व्यक्तित्व एवं नेतृत्व वाले इस नाम का इस तरह से हटना काफी चिंता के साथ लिया जा रहा है। ग्वालियर तक इस खबर के पहुंचने की सुगबुगाहट है।

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