भारत में राज्यों की निरंतर रूप से कर्ज लेने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही, कर्जदारों की सूची में मप्र भी आगे बढ़ रहा

बढ़ता कर्ज, नंबर वन होने को राज्य बेकरार, तमिलनाडु प्रथम 10 की सूची में पहले नंबर पर, बडेÞ कर्जदारों की सूची में दूसरे नंबर पर यूपी

ब्रह्मास्त्र भोपाल

भारत में राज्यों की निरंतर रूप से कर्ज लेने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। वर्तमान में तमिलनाडु प्रथम 10 की सूची में पहले नंबर पर हैं। बडेÞ कर्जदारों की सूची में दूसरे नंबर पर उत्तरप्रदेश चल रहा है और तीसरे नंबर पर महाराष्ट्र चल रहा है। कर्जदारों की इस सूची में मध्यप्रदेश भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश का कुल कर्ज 4.18 लाख करोड़ के पार पहुंच चुका है जो कि राज्य के बजट से अधिक हो गया है।
भारतीय रिजर्व बैंक और राज्य बजट के दस्तावेजों के मुताबिक कई बड़े और छोटे राज्यों पर काफी ज्यादा कर्ज है। 2025-26 के लेटेस्ट डेटा से ऐसा पता चलता है कि यह स्थिति काफी ज्यादा गंभीर है। यह अब डेवलपमेंट खर्च, वित्तीय स्थिरता, और लंबे समय की आर्थिक ग्रोथ पर असर डाल रहा है।

ल्ल टाप टेन में तमिलनाडु सबसे ऊपर – कुल बकाया कर्ज के मामले में तमिलनाडु फिलहाल सबसे ज्यादा कर्ज वाला भारतीय राज्य है। 2024 में राज्य का कर्ज रूपए 8.34 लाख करोड़ से ज्यादा का हो गया है और 31 मार्च 2026 तक इसके 9 लाख करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान है।
ल्ल उत्तर प्रदेश दूसरे, महाराष्ट्र तीसरे नंबर पर- उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है जिसका बकाया कर्ज 2025-26 के अनुमानों के मुताबिक लगभग 8.2 लाख करोड़ से 8.5 लाख करोड़ पहुंच सकता है। महाराष्ट्र की बात करें तो 2024-25 में इसका कर्ज लगभग 7.22 लाख करोड़ था।

ल्ल टाप 5 में बंगाल, कर्नाटक – पश्चिम बंगाल लगभग रूपए 6.58 लाख करोड़ के कर्ज के साथ चौथे स्थान पर है। इतना ही नहीं बल्कि राज्य का कर्ज से जीएसडीपी अनुपात भी ज्यादा रहा है। वहीं कर्नाटक की बात करें तो वह 5.97 लाख करोड़ कर्ज के साथ 5वें स्थान पर है।
ल्ल टॉप 10 में मध्यप्रदेश शामिल- राजस्थान पर 5.62 लाख करोड़ का कर्ज है। आंध्र प्रदेश का कुल कर्ज भार 4.90 लाख करोड़ है। गुजरात राज्य पर कुल कर्ज 4.67 लाख करोड़ रुपए का है। केरल का कुल कर्ज 4.29 लाख करोड़ रुपए हो गया है। वहीं मध्य प्रदेश का कुल कर्ज 4.18 लाख करोड़ के पार पहुंच चुका है।

ल्ल कर्ज से जीएसडीपी अनुपात- हालांकि कुल कर्ज के आंकड़े ध्यान खींचते हैं लेकिन कर्ज से जीएसडीपी अनुपात को वित्तीय सेहत का ज्यादा सटीक संकेतक माना जाता है। पंजाब सबसे खराब स्थिति में है जहां कर्ज उसके जीएसडीपी का लगभग 44.5% हो गया है। जम्मू कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश ने खतरनाक 50% का आंकड़ा पार कर लिया है। इसी के साथ पश्चिम बंगाल और केरल 35 से 38% की रेंज में हैं।

इन राज्यों ने बेहतर मैनेज किया
कुल मिलाकर तनाव के बावजूद भी कुछ राज्यों ने काफी अच्छा वित्तीय प्रबंधन दिखाया है। गुजरात, महाराष्ट्र और उड़ीसा ने अपने कर्ज से जीएसडीपी अनुपात को 20% के करीब या उससे नीचे रखने में कामयाबी हासिल की है। जनवरी 2026 के अनुमानों के मुताबिक राज्यों से ऐसी उम्मीद है कि वह वित्तीय वर्ष की आखिरी तिमाही में लगभग 5 लाख करोड़ का कर्ज लेंगे। 16वें वित्त आयोग द्वारा वित्तीय मजबूती पर जोर देने के साथ लक्ष्य 2031 तक केंद्र और राज्य के संयुक्त कर्ज को जीडीपी के 50% तक कम करना है।

केंद्रीय बजट आते ही मप्र ने लिया कर्ज
केंद्रीय बजट आने के दो दिन बाद मध्यप्रदेश सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में 5200 करोड़ रुपए के कर्ज फिर से लिए हैं। यह कर्ज एमपी सरकार को तीन किस्तों में जारी किया जाएगा। इसके बदले में राज्य को अपनी वित्तीय स्वायत्तता में भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। इस नए कर्ज के साथ मध्य प्रदेश का कुल कर्ज अब लगभग 4.75 लाख करोड़ का हो जाएगा, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य के 4.2 लाख करोड़ रुपए के बजट से लगभग 55,000 करोड़ रुपए अधिक है। राज्य सरकार अपने बढ़ते कर्ज के बोझ को सही ठहरा रही है। सरकार का कहना है कि अपने बड़े विकास लक्ष्यों के अनुरूप सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए धन की आवश्यकता होती है। विकास कार्यों के लिए सरकार भविष्य में भी कर्ज लेती रहेगी।

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