नीमच । जिले की जावद तहसील में शिकारियों ने जंगली सुअर के लिए लगाए गए जाल में फंसे तेंदुआ की कुल्हाडी से मार डालने का मामला सामने आया है। वन विभाग ने 3 शिकारियों को पकडा है। मामले में वन विभाग के अधिकारियों पर सवालिया निशान खडे हो रहे हैं। घटना को लेकर दो दिन में वन विभाग की और से दो प्रकार के आए बयानों ने संदिग्ध स्थिति बना दी है।
घटना 4 जनवरी की है। मनासा वन परिक्षेत्र की बैसदा बीट में वन विभाग को 3 साल के मृत तेंदुए का शव मिलने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की जांच शुरू की गई। तेंदुए का पोस्टमार्टम वन्यजीव विशेषज्ञ चिकित्सकों (1) डॉ. जीवन नाथ एवं (2) डॉ. भूपेश पाटीदार द्वारा किया गया। 3 साल के नर तेंदुए की कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या कर दी। वहीं आरोप है कि वन विभाग ने चार दिनों तक इस सनसनीखेज घटना को दबाने की कोशिश की और मीडिया को भ्रामक जानकारी दी। अब इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
घटना के दूसरे दिन वन विभाग की ओर से जारी प्रेस नोट में दावा किया गया कि वन्यजीव तेंदुए के शरीर के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं। लेकिन शुक्रवार को इस मामले में जावद तहसील के जनकपुर और परवनी निवासी तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और खुलासा किया गया कि तेंदुए पर कुल्हाड़ी से हमला कर उसकी हत्या की गई थी। जावद तहसील के जनकपुर निवासी सुनील भील, परवनी निवासी देवीलाल भील और अंबालाल भील ने जंगली सूअर के शिकार के लिए जाल लगाया था, जिसमें तेंदुआ जा फंसा। इसके बाद आरोपियों ने जाल में फंसे तेंदुए पर कुल्हाड़ी से वार कर उसकी हत्या कर दी और मृत तेंदुए के शव को मनासा वन परिक्षेत्र में फेंक आए। घटना के दूसरे दिन वन विभाग की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया था कि वन्यजीव तेंदुए के शरीर के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं और शिकार के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। लेकिन शुक्रवार को जब इस पूरे मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, तब खुलासा हुआ कि तेंदुए की कुल्हाड़ी से हत्या की गई थी। इस गंभीर मामले में लापरवाही बरतने की स्थितियों को लेकर वन मंडल अधिकारी एस.के. अटोदे, पोस्टमार्टम करने वाले विशेषज्ञ डॉ. जीवन नाथ, डॉ. भूपेश पाटीदार और संबंधित क्षेत्र के लापरवाह कर्मचारियों की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठ रही है।