देपालपुर। ग्राम पंचायत जलोदियापंथ में मनरेगा सहित विभिन्न विकास कार्यों में वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के मामले में जनपद पंचायत देपालपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बड़ी कार्रवाई की है। पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के तहत पारित आदेश में ग्राम पंचायत जलोदियापंथ के सरपंच बलदेव पटेल को तत्काल प्रभाव से सरपंच पद से हटा दिया गया है। साथ ही उन्हें पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 40(2) एवं 92(5) के तहत छह वर्ष की अवधि के लिए निर्वाचन के लिए निरर्हित घोषित किया गया है। यह कार्रवाई 24 जून 2026 को पारित आदेश में की गई है। इसी मामले में ग्राम पंचायत जलोदियापंथ के सचिव जसवंत सिंह यादव के विरुद्ध मध्यप्रदेश पंचायत सेवा आचरण नियम 1998 तथा मध्यप्रदेश पंचायत सेवा (ग्राम पंचायत सचिव भर्ती एवं सेवा की शर्तें) नियम 2011 एवं 9 अगस्त 2017 को प्रकाशित संशोधित नियमों के नियम 7 के तहत पृथक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।मनरेगा और ट्रेवल मार्ग निर्माण में ₹4.28 लाख के आहरण का मामला-आदेश में दर्ज जांच निष्कर्षों के अनुसार, मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 89(1) के तहत विस्तृत जांच एवं सुनवाई के बाद यह तथ्य सामने आया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत सामुदायिक वृक्षारोपण कार्य वर्ष 2022-23 एवं 2023-24 तथा ट्रेवल मार्ग निर्माण कार्य में कुल 4 लाख 28 हजार रुपये का आहरण किया गया। जांच के दौरान कार्यस्थल के भौतिक सत्यापन में एक भी पौधा तथा संबंधित कार्य का भौतिक अस्तित्व नहीं पाया गया। आदेश में इसे शासकीय धन के प्रत्यक्ष दुरुपयोग तथा ग्राम पंचायत कोष की क्षति से जुड़ा गंभीर मामला माना गया है।
संपूर्ण जांच, दस्तावेजों, शिकायतों, भौतिक सत्यापन और सुनवाई की प्रक्रिया के आधार पर आदेश में पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 40(1) के अंतर्गत बलदेव पटेल को ग्राम पंचायत जलोदियापंथ के सरपंच पद से तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही धारा 40(2) एवं 92(5) के अंतर्गत उन्हें निर्वाचन के लिए छह वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित किया गया है। सचिव के विरुद्ध अलग से कार्रवाई-सरपंच के साथ ग्राम पंचायत जलोदियापंथ के सचिव जसवंत सिंह यादव के विरुद्ध भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि उनके संबंध में सरपंच की तरह पद से हटाने का आदेश नहीं दिया गया, बल्कि मध्यप्रदेश पंचायत सेवा आचरण नियम 1998 तथा मध्यप्रदेश पंचायत सेवा (ग्राम पंचायत सचिव भर्ती एवं सेवा की शर्तें) नियम 2011 और 9 अगस्त 2017 के संशोधित नियमों के नियम 7 के तहत पृथक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।