देवास। जिला मुख्यालय के नजदीक ग्राम पंचायत चंदाना अंतर्गत हुई संदिग्ध मौतों के मामले में संभागायुक्त आशीषसिंह के आदेश पर गठित 5 सदस्यीय संभागीय दल ने मंगलवार से जांच का काम शुरू कर दिया है। इधर कांग्रेस ने कलेक्टोरेट घेराव के आंदोलन को अंजाम देते हुए शराब विक्रेताओं पर हत्या का प्रकरण दर्ज करने की मांग रखी है। जिले में आबकारी विभाग सक्रिय हुआ है और 36 घंटे में अवैध शराब विक्रेताओं पर कार्रवाई करते हुए 23 प्रकरण दर्ज किए हैं।चंदाना में कथित जहरीली शराब के सेवन से हुई मौतों पर सवाल खडा होने पर शनिवार को संभागायुक्त आशीषसिंह ने जांच के आदेश दिए थे। इसके लिए 5 सदस्यीय समिति बनाई गई थी। समिति से 15 दिनों में जांच रिपोर्ट मांगी है। समिति अध्यक्ष अपर कलेक्टर उज्जैन प्रथम कौशिक को बनाया गया है। समिति में शेष 4 सदस्यों में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गरोठ रामस्नेही मिश्रा, एसडीओपी सैलाना लेखराज मीणा ,आबकारी विभाग के संभागीय उडनदस्ता प्रभारी उपायुक्त हर्षवर्धन राय, क्षेत्रीय संचालक लोक स्वास्थ्य दीपक पिप्पल को शामिल किया गया है।पंचायत भवन से जांच की शुरूआत-मंगलवार को दोपहर में जांच समिति देवास के ग्राम चंदाना में पहुंची थी। जांच समिति प्रारंभिक स्तर पर ग्राम पंचायत चंदाना के पंचायत भवन पहुंची उसके उपरांत ग्राम पंचायत सचिव एवं सरपंच सहित अन्य को साथ लेकर गांव में मृतकों के घरों पर पहुंची। जांच समिति सदस्य डा.पिप्पल के स्थान पर उनके प्रतिनिधि डा.एम के जोशी शामिल हुए । जांच समिति में शेष सभी सदस्यों में एएसपी रामस्नेही मिश्रा सहित सभी सदस्य उपस्थित रहे। समिति अध्यक्ष अपर कलेक्टर कौशिक ने मृतकों के परिजनों से घटना को लेकर जानकारी ली है। इस दौरान काफी लोग उपस्थित रहे हैं। एक तरह से जांच खुले रूप से ही की गई है। परिजनों से मृतकों को अस्पताल ले जाने और सभी जानकारियों से संबंधित प्रश्न किए गए।कांग्रेस ने हत्या का प्रकरण दर्ज की मांग रखी-चंदाना में शराब से मौतों को लेकर कांग्रेस ने पूर्व घोषित विरोध के तहत मंगलवार को देवास कलेक्टोरेट का घेराव नहीं करते हुए कार्यालय के बाहर मुख्य रोडा पर चक्काजाम कर अपना विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मंत्री सजजन वर्मा सहित वरिष्ठ कांग्रेसियों के साथ सैंकडों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने जाम के दौरान सडक पर बैठकर विरोध दर्ज करवाया। प्रदर्शन के दौरान बताया गया कि शराब से कई लोगों की मौत के बाद कांग्रेस ने प्रशासन से ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन प्रशासन ने कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की। कांग्रेस की मांग है कि इस मामले में शराब ठेकेदारों पर धारा 302 (हत्या)307 के तहत FIR दर्ज कर हत्या का मुकदमा चलाया जाए। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही दोषियों पर 302 में FIR दर्ज नहीं हुई तो आने वाले दिनों में कांग्रेस इंदौर और उज्जैन होते हुए देवास में 50 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं के साथ बड़ा आंदोलन करेगी।36 घंटे में 23 आबकारी प्रकरण -चंदाना मामले के जहरीली शराब का जिक्र आने के बाद से देवास आबकारी विभाग एक दम सक्रिय हुआ है। पिछले 36 घंटे में विभाग ने दबिश मारकर आबकारी अधिनियम की धारा 34(1) के तहत 23 प्रकरण पंजीबद्ध किए हैं।कार्रवाई में देशी मदिरा प्लेन के 237 पाव, 97 लीटर हाथ भट्टी कच्ची मदिरा, 755 किलोग्राम महुआ लाहन और 31 बीयर कैन जब्त किए गए हैं। जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत रूपए 1.20 लाख हैं। विभाग की अधिकृत विज्ञप्ति के अनुसार सोमवार को जिला आबकारी अधिकारी द्वारा गठित आबकारी के दलों द्वारा देवास शहर में अम्बेडकर नगर, राजकुमार ढाबा, कालूखेड़ी में फैमली ढाबा, ग्राम नागुखेड़ी, मक्सी रोड स्थिति दा साहब का ढाबा,ग्राम सिया में नेशनल हाईवे ढाबा एवं महाकाल ढाबा तथा सोनकच्छ, बरखेड़ा, सन्नोड, पटाडी, बागली, कन्नौद, पानीगांव, खातेगांव, नेमावर, विक्रमपूर, हरणगांव, टोंकखुर्द आदि संदिग्ध क्षेत्रों में गश्त और दबिश कार्य किया गया।ग्रामीणों का कहना पहले से कैसे बताया भ्रामक-मामले में चंदाना के ग्रामीण भी अंदर ही अंदर उद्वेलित हैं। उनका कहना है कि मामले में कुछ मौतों को प्राकृतिक माना जा सकता है। सभी को नहीं। दो जवान मौतों के मामले में औद्योगिक थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी और पोस्टमार्टम करवाया है। इन दोनों मामलों में अभी पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आना शेष है। बिसरा जांच भी आना शेष है। परिजनों ने इन मामलों में आरोप लगाए हैं लेकिन उससे पहले ही देवास एसडीएम अभिषेक शर्मा ने विडियो जारी कर इन मौतों को भी प्राकृतिक बता दिया। यही नहीं उन्होंने तो दोनों युवा मौतों को लेकर और भी बहुत दावे कर दिए जो अपने आप में ही सवालिया निशान खडे कर रहे हैं। यही नहीं जनसंपर्क विभाग ने बगैर आधार के ही कुछ मौतों के मामले में संदिग्ध स्थिति को दरकिनार करते हुए भ्रामक बताया है। उसके पीछे आधार क्या रहा है और ऐसा क्यों किया गया किसके कहने पर ऐसा किया गया। जांच से पूर्व निष्कर्ष की स्थिति का एसडीएम एवं जनसंपर्क विभाग को अधिकार था क्या। ग्रामीणों के उठाए जा रहे प्रश्न अबुझ स्थिति में देखे जा रहे हैं।