रिवर फ्रंट के रूप में विकसित किया जाएगा  शिप्रा नदी के घाटों को

उज्जैन। सिंहस्थ की तैयारियां के तहत शिप्रा नदी के घाटों को रिवर फ्रंट के रूप में विकसित किया जाएगा जो 9 किमी लंबा होगा। 64.24 करोड़ से घाट क्षेत्र का पुनर्विकास कर बनाया जाएगा। इस काम को 18 महीनों में पूरा करने लक्ष्य है। प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद फिलहाल ठेकेदार चयन की प्रक्रिया जारी है।

दरअसल, ननि ने वाटर रिजुवेनेशन प्रोजेक्ट के तहत तैयार इस परियोजना का मूल फोकस शिप्रा के पारिस्थितिक संतुलन को सुधारते हुए उसकी धार्मिक गरिमा को संरक्षित करना है। योजना के मुताबिक 9 किमी लंबे पुराने घाटों की मरम्मत कर पारंपरिक पत्थर की शैली में छत्रियां, मंडप, मेहराब और शेड बनाए जाएंगे। नदी के किनारों पर लैंडस्केपिंग, हरित बफर जोन और पैदल प्रोमोनेड विकसित कर घाटों को एकीकृत रिवर फ्रंट का स्वरूप दिया जाएगा। इसके अलावा सीनियर सिटीजन और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए रैम्प, रेलिंग और बैरियर फ्री पहुंच मार्ग बनाए जाएंगे जिससे भीड़ के दौरान भी सुरक्षित एवं आसान आवागमन हो सके। रिवर फ्रंट बनने के बाद शहर केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि सांस्कृतिक एवं पर्यटन के रूप में और अधिक विकसित होगा। निर्माण के बाद संबंधित एजेंसी को पांच सालों तक संचालन और रखरखाव करना होगा। शुरुआत दो वर्ष डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड होंगे जिसमें किसी भी प्रकार की तकनीकी कमी की जवाबदेही एजेंसी की रहेगी। गुणवत्ता नियंत्रण, सुरक्षा मानक और पर्यावरण से संबंधित निर्देशों का अनिवार्यत: पालन करना होगा।

6 माह में लगेंगे दिशा सूचक बोर्ड और साइन बोर्ड

अगले 6 महीनों के भीतर सभी प्रमुख मार्गों पर दिशा सूचक चिन्ह और वेरिएबल मैसेजिंग साइन (सीएमएस) बोर्ड लगाना अनिवार्य किया गया है।

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