मातृशक्ति  के लिए शहर में सार्वजनिक स्थानो पर फीडिंग रूम का अभाव

 सारंगपुर।सरकार पहले छह माह तक केवल स्तनपान और दो वर्ष तक मां का दूध पिलाने का संदेश दे रही है, लेकिन सारंगपुर में मातृशक्ति के लिए सम्मानजनक स्तनपान की बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। बस स्टैंड, मुख्य बाजार और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं को खुले में शिशु को दूध पिलाने की मजबूरी झेलनी पडती है। शर्म और असहजता के कारण कई माताएं समय पर स्तनपान नहीं करा पातीं, जिससे नवजातों के पोषण और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड रहा है।
विश्व स्तनपान सप्ताह पर भी नहीं दिखी ठोस पहल-विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान भी शहर में बडे स्तर पर जनजागरूकता अभियान नहीं दिख रहे हैं। आंगनबाडी केंद्रों तक ही गतिविधियां सीमित हैं, जबकि बस स्टैंड, बाजार और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर कहीं भी मदर फीडिंग रूम की व्यवस्था नहीं है। परियोजना अधिकारी केदार प्रसाद शर्मा के अनुसार आंगनबाड कार्यकर्ताओं द्वारा धात्री महिलाओं को लगातार जागरूक किया जाता है, हालांकि कई महिलाएं भी स्तनपान को लेकर लापरवाही बरतती हैं।
1009 धात्री माताएं, 184 बच्चे कुपोषित-महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार सारंगपुर परियोजना में 1009 धात्री महिलाएं हैं। वहीं 184 बच्चे कुपोषण की श्रेणी में हैं, जिनमें 28 अति कुपोषित और 156 मध्यम कुपोषित शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जन्म के तुरंत बाद मां का पहला दूध और छह माह तक केवल स्तनपान शिशु के स्वस्थ विकास की सबसे मजबूत नींव है। ऐसे में शहर में स्तनपान कक्ष और व्यापक जनजागरूकता अभियान शुरू करना समय की सबसे बडी जरूरत बन गया है।बाल रोग विशेषज्ञ बोले: पहले 6 माह सिर्फ मां का दूध, 2 वर्ष तक जारी रखें स्तनपान-बाल शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकित यादव ने बताया कि जन्म के बाद पहले छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए। इसके बाद 12 माह तक पूरक आहार शुरू किया जा सकता है, लेकिन दो वर्ष की आयु तक मां का दूध पिलाना जारी रखना चाहिए। इससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है। मां का दूध पीने वाले बच्चों में निमोनिया और दस्त जैसी बीमारियों का खतरा कम रहता है। वहीं नियमित स्तनपान कराने वाली धात्री महिलाओं में स्तन (ब्रेस्ट) कैंसर की संभावना भी कम हो जाती है। ऐसे में स्तनपान केवल शिशु ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी है।
 अभियान के बावजूद धात्री माताएं बरत रहीं लापरवाही-परियोजना अधिकारी शर्मा ने बताया कि शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के सभी आंगनबाडी केंद्रों पर कार्यकर्ताओं द्वारा धात्री महिलाओं को नियमित रूप से स्तनपान के महत्व, सही विधि और पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने की आवश्यकता के बारे में विस्तार से समझाया जाता है। घर-घर संपर्क कर भी माताओं को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जागरूकता के बावजूद कुछ धात्री महिलाएं शिशु को समय पर और पर्याप्त स्तनपान नहीं करातीं, जिससे बच्चों के समुचित शारीरिक एवं मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड सकता है। विभाग ने माताओं से अपील की है कि वे आंगनबाडी कार्यकर्ताओं और चिकित्सकों की सलाह का पालन करते हुए शिशु को नियमित रूप से स्तनपान कराएं।

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