जावरा। पुलियाखाल सौंदर्यीकरण योजना नगर पालिका के जवाबदारों की घोर लापरवाही से खटाई में मध्यप्रदेश शासन द्वारा जावरा नगर पालिका को 8 करोड़ का भुगतान जावरा नगर पालिका अधिकारियों द्वारा योजना के आधे अधूरे कार्यों पर 7 करोड़ 60 लाख का भुगतान पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनिल दसेड़ा ने जावरा शहर की सबसे महती योजना पीलियाखाल सौंदर्यीकरण योजना को 8 वर्ष में भी पूरा नहीं करना अधिकारियों की कार्य शैली पर प्रश्नवाचक चिन्ह लगाता हे मध्यप्रदेश शासन द्वारा योजना स्वीकृत कर 8 करोड़ जावरा नगर पालिका को भुगतान कर दिए लापरवाह अधिकारियों ने योजना को ग्राउंड लेबल पर गंभीरता से नहीं लेते हुवे ऑफिस में बैठे बैठे योजना के कार्य का आकलन कर ठेकेदार को लगभग 7 करोड़ 60 लाख का भुगतान कर दिया जबकि 5 माह पूर्व मैने स्वयं पीलिया खाल सौंदर्यीकरण योजना का निरीक्षण किया तो योजना अंतर्गत सिर्फ मालीपुरा रपट से श्मशान तक अंडर ग्राउंड पाइप लाइन डाली गई साथ ही आनंदी हनुमान श्मशान के आगे पानी साफ करने के लिए ट्रीटमेंट प्लांट का सिर्फ ढांचा बना था मैने अधिकारियों की घोर लापरवाही को लेकर नगरीय प्रशासन मंत्री प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन विभान संभाग आयुक्त उज्जैन कलेक्टर महोदय रतलाम को पत्र के माध्यम से अधिकारियों की घोर लापरवाही से अवगत कराया था लेकिन दुर्भाग्य जब 27 अक्टूबर 2026 को पुनः पीलिया खाल सौंदर्यीकरण योजना कार्य का निरीक्षण करने गया तो 5 माह पूर्व जावरा से लगाकर मध्यप्रदेश शासन तक सभी जवाबदारों को पत्र के माध्यम से अवगत कराने के बाद भी पीलिया खाल सौंदर्यीकरण योजना का कार्य 5 माह पूर्व वाली स्थिति में हे यह मध्यप्रदेश शासन के जवाबदार अधिकारियों की कार्य शैली पर भी प्रश्नवाचक चिन्ह लगता हे पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनिल दसेड़ा ने आगे बताया कि जावरा शहर के नागरिक लंबे समय से पीलिया खाल की गंदगी से परेशान थे जावरा शहर के गंदे नालों और नालियों का पानी जो पीलियाखाल में मिलने से शहर का वातावरण दूषित हो रहा था जिससे शहर के नागरिकों के स्वास्थ पर प्रतिकूल असर पड़ रहा था साथ ही गंदा पानी नदी में इकठ्ठा होकर गंदगी और बदबू फैलाता साथ ही गंदे नालों का पानी पुलियाखाल के आस पास के ट्यूबवेलों और हेड पम्पों के माध्यम से लोगो को पीने से उनके स्वस्थ पर प्रतिकूल असर डाल रहा था उक्त गंभीर समस्या से जावरा शहर की मुक्ति दिलाने के लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा मुख्य मंत्री अधो संरचना योजना के अंतर्गत पुलियाखाल सौंदर्यीकरण योजना मंजूर करी थी उक्त योजना में गंदे पानी को पाइप लाइन के माध्यम से शहर के बाहर आनंदी हनुमान श्मशान के आगे ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर पानी साफ कर किसानों को सिंचाई के लिए देना शहर के नालों और नालियों का गंदा पानी जब पाइप लाइन के माध्यम से ट्रीटमेंट प्लांट तक जाएगा तो पुलिया खाल का स्वरूप बदलेगा इस योजना के पूर्ण होने परनागरिकों को स्वच्छ वातावरण मिल सके। कोटा की चंबल नदी और अहमदाबाद की साबरमती नदी की तर्ज पर विकास की परिकल्पना की गई थी।लेकिन वर्षों बाद भी इस महत्वाकांक्षी योजना का अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आया। जिस योजना से शहर को गंदगी से मुक्ति मिलनी थी, वही अब सरकारी धन के उपयोग और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवालों के घेरे में है।
पुलियाखाल सौंदर्यीकरण योजना नगर पालिका के जवाबदारों की लापरवाही से खटाई में:जवाबदेही सवालों के घेरे में…