पश्चिम एशिया युद्ध की मार के कारण मप्र का सोया निर्यात 50% गिरा, मंडियों में पसरा सन्नाटा

ब्रह्मास्त्र इंदौर

मध्य प्रदेश, जिसे देश का ‘सोया स्टेट’ कहा जाता है, इस वक्त एक बड़े वैश्विक आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष और शिपिंग रूट्स में आए व्यवधान के कारण भारत का सोया मील निर्यात मार्च महीने में 50 फीसदी तक गिरने के आसार हैं। फरवरी में जहां करीब 93,000 टन का निर्यात हुआ था, वहीं मार्च में इसके महज 40,000 से 50,000 टन रहने का अनुमान है। इस गिरावट का सीधा असर मध्य प्रदेश की मंडियों और किसानों की आय पर दिखना शुरू हो गया है।

निर्यात घटने के 3 बड़े कारण
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया के अनुसार, निर्यात गतिविधियों पर लॉजिस्टिकल चुनौतियों का पहाड़ टूट पड़ा है। लाल सागर और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण जहाजों के रास्ते बदल गए हैं या देरी हो रही है। इससे माल ढुलाई का खर्च और इंश्योरेंस प्रीमियम काफी बढ़ गया है। निर्यातकों को माल भेजने के लिए खाली कंटेनर नहीं मिल रहे हैं, जिससे फ्रेश आॅर्डर लेने में जोखिम बढ़ गया है। इसके अलावा भारतीय सोया मील अंतरराष्ट्रीय बाजार में $500-$505 प्रति टन पर है, जबकि ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे देश $420-$430 में माल दे रहे हैं। महंगा होने के कारण भारतीय माल की मांग कम हो गई है।

एमपी की मंडियों पर असर
मध्य प्रदेश भारत के कुल सोयाबीन उत्पादन और व्यापार का केंद्र है। निर्यात में सुस्ती का सीधा मतलब है कि स्थानीय मंडियों में स्टॉक का उठाव धीमा हो गया है। व्यापारियों की धारणा कमजोर हुई है और इसका सीधा दबाव सोयाबीन के भावों पर देखा जा रहा है। ईरान और अन्य खाड़ी देशों ने अपनी खरीदारी कम कर दी है, जिससे घरेलू स्टॉक बढ़ रहा है। मार्केट में अनिश्चितता बनी हुई है। शिपिंग रूट्स बाधित होने से निकट भविष्य में सुधार की उम्मीद कम है। भारतीय मूल के मील की कीमतें पहले ही ज्यादा थीं, ऊपर से भू-राजनीतिक तनाव ने मांग को और कम कर दिया है और नए आॅर्डर टल रहे हैं। – वी.के. जैन, इंदौर आधारित निर्यातक

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