जुटे किसान एवं पहुंचे तहसील कार्यालय जमीन अधिग्रहण व मुआवजे की समस्या को सिलसिलेवार रखा किसान संघ के बैनर तले एसडीएम को ज्ञापन सौंपा

उज्जैन। जमीन अधिग्रहण एवं मुआवजा में आने वाली समस्या को लेकर उज्जैन के किसान एक जुट हुए हैं। उन्होंने मंगलवार को आने वाली समस्याओं को एकजाई करते हुए सिलसिलेवार तहसील प्रशासन को इससे अवगत करवाया है। किसान संघ के बैनर तले इसे लेकर एक ज्ञापन एसडीएम लक्ष्मीनारायण गर्ग को सौंपा गया है।

संघ के जिलाध्यक्ष बहादुरसिंह आंजना के अनुसार जिला कार्यालय पर समस्या को लेकर किसाना एकजुट हुए और उसके उपरांत तहसील कार्यालय पहुंचे थे। यहां किसान हितों में नारेबाजी करने के उपरांत ज्ञापन सौंपते हुए आने वाली समस्याओं का वाचन कर उन्हें शीघ्र ही दूर करवाने की मांग रखी गई हैं। ज्ञापन देते समय कोषाध्यक्ष राजेश सोलंकी तहसील अध्यक्ष मानसिंह चौधरी तहसील उपाध्यक्ष कैलाश चौधरी,जालम सिंह मीडिया प्रभारी जिला उज्जैन आदि उपस्थित थे। ज्ञापन का वाचन सह मंत्री जयपाल सिंह चावड़ा ने किया।

ये रखी मांग-

  1. दताना नरवल एयरपोर्ट में जो किसानों की उपजाऊ जमीन अधिग्रहण की जा रही है उसमें बाजार मूल्य से चार गुना एवं सभी किसानों को समान रूप से मुआवजा दिया जाये।
  2. एयरपोर्ट के विस्तार के लिये अधिग्रहण की जा रही जमीनों का मुआवजा भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के नए संशोधन अनुसार जमीनों के खरीदी बिक्री के छांट बिक्री पत्र के हिसाब से गुणांक फैक्टर 2 लगा कर दिया जाए।
  3. अधिग्रहण के बाद किसानों की जो जमीन शेष बच रही है उस जमीन पर किसान को आने जाने के लिये कम से कम 45 फीट के रास्ते की व्यवस्था की जाए एवं उस जमीन के पानी निकासी की भी सुचारू रूप से निकासी की जाए।
  4. किसानों की जमीन जो एयरपोर्ट के पास बच रही है उसे आवासी की जाए और भूमि परिवर्तन (डायवर्सन) की परमिशन भी दी जाए।
  5. जिन किसानों की जमीन अधिग्रहण हो रही है और उनकी थोड़ी जमीन बच रही है तो उसे पूरी अधिग्रहण की जाए।
  6. किसानों को मुआवजा राशि के पेमेंट निकालने में किसी प्रकार की काटछाट नही की जाए एवं एक साथ पेमेंट निकालने की अनुमति दी जाए।
  7. उज्जैन नागदा ग्रीनफील्ड रोड में किसानों को बाजार मूल्य से चार गुना मुआवजा दिया जाए।
  8. उज्जैन इंदौर ग्रीनफील्ड रोड में मुआवजा से वंचित किसानों को जल्दी मुआवजा दिया जाए।
  9. तहसीलदार अर्चना गुप्ता का रवैया किसानों के प्रति ठीक नहीं है जहां पर भी सीमांकन या कोई समन्‍वय बैठाने की चर्चा हो तो उनके द्वारा किसानों को डराया व धमकाया जाता है।

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