खुसूर-फुसूर सतर्क रहें,सजग रहें… रंगों के पर्व के तहत ही रंगपंचमी का आयोजन मालवा में जमकर होता है। रंगों के इस पर्व को विकृत मानसिकता के लोगों ने कुछ वर्षों में विवाद का केंद्र बनाया हुआ है

खुसूर-फुसूर

सतर्क रहें,सजग रहें…

रंगों के पर्व के तहत ही रंगपंचमी का आयोजन मालवा में जमकर होता है। रंगों के इस पर्व को विकृत मानसिकता के लोगों ने कुछ वर्षों में विवाद का केंद्र बनाया हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में विवाद की स्थितियां इस पर्व पर कुछ ज्यादा ही सामने आई है। पर्व को नशाखोरी का दिन बना दिया गया है। जमकर हुडदंग किया जाता है। यहां तक की रंगों से खेलने की बजाय पर्व को रक्त रंजित किया जाने का प्रयास किया जाता है। त्यौहार जीवन में उल्लास एवं उत्साह का रंग भरने के लिए होते हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे घटनाक्रम को लेकर हम सभी को सजग रहने की जरूरत साफ तौर पर देखी जा रही है। इस सजगता में हमें अपने स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस का साथ देते हुए उनके निर्देशों का पालन करना है। रंगपंचमी के दिन शहर में अन्यानेक आयोजन एक साथ होना है। समाजों की गेर के साथ ही बडे आयोजन भी होंगे। दिन भर ही ये आयोजन किए जाएंगे ।किसी भी प्रकार के मसले की स्थिति में नागरिक कर्त्तव्यों का पालन सुनिश्चित करना है। जरायम पेशाओं की हरकतों से पुलिस को तत्काल वाकिफ करवाना है। पुलिस एवं प्रशासन आम नागरिकों के अधिकारों एवं सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। हुडदंग करने वालों की भी जानकारी तत्काल ही पुलिस एवं प्रशासन को दी जाना चाहिए। संयम एवं संस्कार के साथ रंगों का खेलना निश्चित करना चाहिए। किसी पर भी जबरिया रंग डालना या मजबूर करना किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं कहा जा सकता है। खुसूर-फुसूर है कि अगर कोई भगडकाने का काम करे तो आपको अपना संयम कायम रखना है न कि उसके मकसद में उसे कामयाब होने देने में। ऐसे तत्वों को नजरअंदाज करना है जो विवादित की पृष्ठभूमि बनाते हैं और अशांत स्थितियों को उजागर करते हैं। सोश्यल मिडिया पर किसी भी प्रकार की अफवाह को प्रसारित करने से भी बचना है। शांति,सद्भाव के साथ आमजन की सुरक्षा में तैनात प्रशासन एवं पुलिस का सहयोग करते हुए जमकर त्यौहार का आनंद लेना है।

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