उज्जैन। अक्षय तृतीया का पर्व भारतीय संस्कृति में अटूट फल देने वाला माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 19 अप्रैल, रविवार को मनाया जाएगा। इस वर्ष की अक्षय तृतीया बेहद खास है क्योंकि इस दिन ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ का शुभ संयोग बन रहा है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस योग में किए गए सभी कार्य सफल होते हैं और उनका फल कभी समाप्त नहीं होता। इस दिन सूर्य और चंद्रमा अपनी उच्च राशियों में होते हैं, जो सफलता और समृद्धि का मार्ग खोलते हैं। यह तिथि नई शुरुआत, खरीदारी और निवेश के लिए अबूझ मुहूर्त मानी जाती है। श्रद्धा के साथ किया गया दान और पूजन न केवल आत्मिक शांति देता है, बल्कि जीवन के सही संचालन में भी सहायक होता है। अक्षय तृतीया पर सर्वार्थ सिद्धि योग का होना एक दुर्लभ घटना है, जो हर किसी के जीवन में सकारात्मकता लाती है। इस योग में किए गए कार्यों में बाधाएं कम आती हैं और परिणाम मनचाहा मिलता है। जो लोग लंबे समय से किसी नए व्यवसाय या काम की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह दिन सबसे उत्तम है। यह शुभ संयोग मानसिक स्पष्टता प्रदान करता है और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाता है।
इन लोगों को मिलेगा विशेष शुभ फल
इस विशेष योग का सबसे अधिक लाभ उन लोगों को मिलेगा जो ईमानदारी और सेवा भाव से अपने कार्ये करते हैं। विद्यार्थियों के लिए यह समय नई शिक्षा या कौशल सीखने के लिए बहुत अच्छा है। व्यापारियों के लिए अपने काम को बढ़ाने और नई साझेदारी शुरू करने का यह सुनहरा अवसर है।
साथ ही, जो लोग अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार चाहते हैं, उन्हें इस दिन देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए। यह योग समाज के हर वर्ग को कुछ न कुछ सकारात्मक देने की शक्ति रखता है। यदि आप निस्वार्थ भाव से किसी जरूरतमंद की मदद करते हैं, तो इस योग का पुण्य फल आपके जीवन की सभी बाधाओं को दूर कर उन्नति के द्वार खोलता है।