सारंगपुर।दिन में तेज धूप और गर्मी, जबकि सुबह और देर रात में ठंडक मौसम का यही दोहरा मिजाज अब लोगों की सेहत पर भारी पडने लगा है। तापमान में आए इस अचानक उतार-चढाव के कारण क्षेत्र में मौसमी बीमारियों और वायरल इंफेक्शन का प्रकोप तेजी से बढा है। घर-घर में लोग सर्दी, खांसी, जुकाम, बदन दर्द और बुखार से पीडित हो रहे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं भी बढ गई हैं।
सिविल अस्पताल की ओपीडी में भारी भीड, रोज पहुंच रहे 600 से 700 मरीज-मौसम में आए बदलाव के कारण सारंगपुर सिविल अस्पताल की ओपीडी में रोजाना मरीजों की भारी भीड उमड रही है। आंकडों के मुताबिक, इन दिनों प्रतिदिन लगभग 600 से 700 मरीज इलाज और परामर्श के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकांश मरीज वायरल बुखार, गले में खराश, तेज खांसी और बदन दर्द की शिकायतों से ग्रस्त हैं। डॉक्टरों का कहना है कि तापमान में दिन और रात के अंतर के कारण शरीर की इम्युनिटी (प्रतिरोधक क्षमता) कमजोर पड जाती है, जिससे वायरल बैक्टीरिया और वायरस तेजी से हमला करते हैं।
बच्चों की सेहत पर सबसे ज्यादा असर: डॉ. अंकित यादव
बदलते मौसम का सबसे पहला और गहरा असर छोटे बच्चों पर देखने को मिलता है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकित यादव के अनुसार अचानक मौसम बदलने से बच्चों में वायरल बुखार, निमोनिया, खांसी और जुकाम के मामले बढ जाते हैं। ऐसे में अभिभावकों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। बच्चों को मौसमी कपडे पहनाएं, उनके खान-पान का ध्यान रखें और उन्हें पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ (पानी, सूप, जूस) दें। उन्होंने अभिभावकों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि बिना डॉक्टरी सलाह के बच्चों को मेडिकल स्टोर से लाकर दवाइयां या एंटीबायोटिक्स न दें। बिना परामर्श के एंटीबायोटिक का सेवन बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर और हानिकारक हो सकता है। यदि बच्चे को बुखार के साथ-साथ सांस लेने में तकलीफ हो, अत्यधिक सुस्ती छाए या शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) के लक्षण दिखें, तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करें।
बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं रहें विशेष सतर्क:डॉ. सरिता यादव
बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी पुरानी बीमारी (जैसे डायबिटीज, बीपी या अस्थमा) से पीडित लोगों के लिए यह मौसम बेहद नाजुक होता है। निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. सरिता यादव ने बताया कि बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इसलिए उन्हें ठंडक के समय खुद को ढककर रखना चाहिए। अचानक गर्म वातावरण से ठंडे वातावरण में जाने से बचें।गर्भवती महिलाओं को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि वे समय-समय पर अपनी नियमित स्वास्थ्य जांच करवाती रहें। संतुलित और पौष्टिक आहार लें, पर्याप्त आराम करें और किसी भी शारीरिक परेशानी को मामूली मौसमी असर मानकर टालने की भूल न करें।
महिलाओं की अनदेखी पड सकती है भारी: डॉ. तस्लीम मंसूरी-स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. तस्लीम मंसूरी का कहना है कि महिलाएं अक्सर घर के कामकाज के चक्कर में अपनी सेहत और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं। यदि महिलाओं को लगातार बुखार, खांसी, जुकाम या शरीर में अत्यधिक कमजोरी व थकान महसूस हो रही है, तो इसे बिल्कुल हल्के में न लें। तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं। समय पर लिया गया सही परामर्श बीमारी को गंभीर रूप लेने से रोकता है।
बदलते मौसम में बीमारियों से बचाव के प्रमुख उपाय
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों को बदलते मौसम में स्वस्थ रहने के लिए सावधानियां बरतने की सलाह दी है। सुबह और देर शाम/रात के समय हल्के गर्म या ढके हुए कपडे पहनें ताकि ठंडी हवा से बचाव हो सके। दिन में गर्मी महसूस होने पर ठंडा पानी या फ्रीज का पानी पीने से बचें। हल्का गुनगुना या सामान्य पानी पिएं। बाजार के खुले, बासी या अत्यधिक ठंडे खाद्य पदार्थों से परहेज करें। ताजा, सुपाच्य और पौष्टिक भोजन लें। हाथों को समय-समय पर धोते रहें और व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखें। थोडी सी भी तबीयत खराब होने पर खुद से दवा न लें, डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
..
मौसम बिगाड़ रहा सेहत: बदलते मौसम से बढ़ा वायरल का प्रकोप, सर्दी-खांसी बनी सिरदर्द