इंदौर। भागीरथपुरा जल कांड के मामले में अब अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी। न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक होकर हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड हो चुकी है। रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए समय दिए जाने की मांग याचिकाकर्ताओं की ओर से की गई। ताकि अगली सुनवाई में रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर प्रभावी बहस की जा सके। हाई कोर्ट में सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता महेश गर्ग और प्रमोद द्विवेदी की ओर से अधिवक्ता मनीष यादव, अधिवक्ता पंडित करण बैरागी तथा अन्य अधिवक्ताओं ने अदालत के सामने पक्ष रखा। उनका तर्क था कि जांच रिपोर्ट अब सार्वजनिक हो चुकी है और रिपोर्ट विस्तृत होने के कारण उसके अध्ययन में समय लगेगा। ऐसे में तत्काल बहस के बजाय रिपोर्ट को पढ़ने और उसके आधार पर तर्क तैयार करने के लिए समय दिया जाना जरूरी है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की पीठ के समक्ष हुई। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 5 नवंबर की तारीख नियत की है।
*रिपोर्ट में जल-सीवर व्यवस्था पर गंभीर सवाल-भागीरथपुरा मामले की न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद जलापूर्ति और सीवरेज व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल सामने आए हैं। रिपोर्ट में पुरानी पाइपलाइन, सीवर और पेयजल लाइनों की तकनीकी खामियों, निगरानी की कमी, शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने और पाइपलाइन बदलने की प्रक्रिया में हुई देरी जैसे पहलुओं का उल्लेख किया गया है।
अभिभाषक मनीष यादव के अनुसार-रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद अब अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। याचिकाकर्ता पक्ष रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई को लेकर अपने तर्क रख सकता है। दूसरी ओर संबंधित पक्ष भी रिपोर्ट के निष्कर्षों पर अपना पक्ष अदालत के सामने रखेंगे।